Home Blog प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले सम्मान से अलंकृत हुईं गरिमा पोयाम

प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले सम्मान से अलंकृत हुईं गरिमा पोयाम

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छत्तीसगढ़ कलमकार मंच बिलासपुर ने वर्ष 2026 के लिए किया चयन, साहित्य और शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का सम्मान

कांकेर

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कांकेर जिले के ग्राम सरोना की निवासी कुमारी गरिमा पोयाम को वर्ष 2026 के लिए प्रतिष्ठित प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनकी सुदीर्घ साहित्य सेवा, अनवरत कला साधना, उत्कृष्ट लेखन कर्म, सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता, देश सेवा की भावना, शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान तथा मानवीय शोध कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

यह सम्मान छत्तीसगढ़ कलमकार मंच बिलासपुर की प्रबंधकारिणी समिति की सर्वसम्मत अनुशंसा पर प्रदान किया गया। संस्था ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिभा और प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 के लिए उनका चयन किया। सम्मान समारोह में गरिमा पोयाम की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा गया कि वे शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में निरंतर सृजनशील भूमिका निभा रही हैं।

गरिमा पोयाम वर्तमान में सेजेस दुधावा में सहायक शिक्षक के रूप में पदस्थ हैं। शिक्षण कार्य के साथ-साथ उन्होंने साहित्य सृजन को भी समान ऊर्जा और समर्पण के साथ आगे बढ़ाया है। उनकी लेखनी में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाएं और राष्ट्रप्रेम की स्पष्ट झलक मिलती है। वे लंबे समय से कविता, लेख, शोधपरक रचनाओं और विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रही हैं।

इसी अवसर पर छत्तीसगढ़ कलमकार मंच बिलासपुर द्वारा प्रकाशित उनकी 29वीं साझा पुस्तक ‘कलम मेरे साथी’ के लिए भी उन्हें कलमकार साहित्य शक्ति अलंकरण-2026 से सम्मानित किया गया। यह उनके जीवन का 32वां सम्मान है, जो उनके निरंतर साहित्यिक अवदान और रचनात्मक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गरिमा पोयाम ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवारजनों और गुरुजनों को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से अपने दादा जी, पिता जी, दादी माँ, नानी माँ, माता जी और शिक्षकों के मार्गदर्शन को अपनी सफलता का आधार बताया। उनका कहना है कि परिवार से मिले संस्कार और गुरुजनों से प्राप्त शिक्षा ने ही उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

स्थानीय स्तर पर भी गरिमा पोयाम की इस उपलब्धि से हर्ष का वातावरण है। ग्राम सरोना सहित पूरे कांकेर जिले में उनके सम्मान को गर्व का विषय माना जा रहा है। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनकी सक्रियता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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