Home Blog स्वतंत्रता सेनानी वीर धुर्वा राव की स्मृति लिंगागिरी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का...

स्वतंत्रता सेनानी वीर धुर्वा राव की स्मृति लिंगागिरी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का भव्य आयोजन

0

A grand tribute programme was organised in Lingagiri in memory of freedom fighter Veer Dhurva Rao.

वक्ताओं की वक्ता समाज के लोगों के लिए बना प्रेरणा यहां अब…

Ro.No - 13672/156

बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – जिले के आवापल्ली तहसील अंतर्गत ग्राम लिंगागिरी तालुकदार में 1856 के स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा स्वतंत्रता सेनानी वीर धुर्वा राव की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होकर अपने वीर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

वीर धुर्वा राव बस्तर क्षेत्र के एक महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 1856 के आसपास अंग्रेजों के अत्याचार और जल-जंगल-जमीन पर कब्जे के खिलाफ आदिवासियों को संगठित कर विद्रोह किया। वे साहसी योद्धा और आदिवासी स्वाभिमान के प्रतीक माने जाते हैं। बताया जाता है कि उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनके वीरता और बलिदान को याद करते हुए समाज के लोग एकत्रित हुए और उन्हें नमन किया। मुख्य अतिथि का स्वागत ग्राम सभा अध्यक्ष हनुमंत गंटल ने पुष्पमाला पहनाकर किया।

कार्यक्रम के दौरान मंच से समाज के वक्ताओं द्वारा पेसा कानून, पांचवीं और छठवीं अनुसूची तथा वनाधिकार अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर बार-बार एक ही नारा गूंजता रहा —
“एक तीर, एक कमान, सब आदिवासी एक समान।”

कार्यक्रम में आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष अशोक तलाण्डी ने कहा कि समाज के सभी लोगों के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समाज यह संदेश देना चाहता है कि समाज आज भी अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए तैयार है।
वहीं वक्ता बुर्का ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वीर धुर्वा राव के इतिहास को जानना बहुत जरूरी है। अगर हम अपने इतिहास को नहीं जानेंगे तो आने वाली पीढ़ी को भी यह पता नहीं चल पाएगा कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए क्या बलिदान दिया है।

प्रदेश से आए वक्ता विनोद नागवंशी (प्रांतीय संगठन सचिव, रूढ़िजन्य परंपरागत समाज रायपुर) ने कहा कि यहां आकर उन्होंने आदिवासी समाज की मातृशक्ति को करीब से देखा और समझा। उन्होंने कहा कि यदि समाज को अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाना है तो मातृशक्ति को शिक्षित और सशक्त बनाना जरूरी है, क्योंकि एक शिक्षित महिला पूरे परिवार को शिक्षित करती है।

डीजीपी रैंक से सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अकबर राम कोर्राम (पूर्व IPS), गोंडवाना गोंड महासभा के प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन आदिवासी समाज को अक्सर गुमराह किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होगा तो जल-जंगल-जमीन पर बाहरी लोगों का कब्जा बढ़ता जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर को नक्सल मुक्त करने के लिए केवल सुरक्षा अभियान पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना भी जरूरी है।

वक्ता सकनी चन्द्रैया प्रधान समाज ने कहा कि समाज की वास्तविक उन्नति तब होगी जब लोग आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगे। इसके लिए समाज को खुद आगे आकर मेहनत और योजना के साथ काम करना होगा।

जिला पंचायत सदस्य शंकरैया माड़वी ने भी कार्यक्रम को सफल बताते हुए कहा कि समाज को शिक्षित होना होगा और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपने अधिकारों के लिए सवाल नहीं पूछेंगे और जागरूक नहीं होंगे, तब तक समाज को उसका हक नहीं मिल पाएगा।

वही आसाम से आएं त्रिपोण आश्ररा (सलाहकार, नरा ने भी कहां हमारे पूर्वजों व सेनानी कौन पहले हमें जानना है। तभी लोगों को बता सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गांव की व्यवस्था, गांव के इतिहास, क्षेत्रीय अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की लड़ाई तथा देवी-देवताओं की पारंपरिक सीमाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

आपको बता दें कि 1856 के शहीद स्वतंत्रता सेनानी वीर धुर्वा राव की स्मृति में इतने वर्षों बाद इस प्रकार का बड़ा आयोजन पहली बार किया गया है। कार्यक्रम में शामिल वक्ताओं ने कहा कि अपने स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास को संजोना और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि आने वाले समय में अन्य स्वतंत्रता सेनानियों जैसे नागुल दोर्रा कोतापल्ली, कन्हैया दोर्रा बोज्जी आदि के सम्मान में भी इसी तरह के बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
लंबे समय बाद आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में काफी उत्साह देखा गया और स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों से आए लोगों ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर स्वतंत्रता सेनानी वीर धुर्वा राव को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के दौरान ककेम नारायण (जिला अध्यक्ष, दोरला समाज बीजापुर), अनिल बुरका (संभागीय अध्यक्ष, दोरला समाज एवं सर्व आदिवासी समाज), शकरैया माड़वी (जिला पंचायत सदस्य), त्रिपति पुनेम (जनपद सदस्य), तिरूमल बौरया, सकनी चन्द्रैया, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जमुना सकनी, पूजा पोंदी, बी.एस. नागेश, वीरैया ध्रुवा, अंगनपल्ली चन्द्रशेखर सहित गांव के सभी पदाधिकारी, क्षेत्र के सरपंच एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समापन संबोधन ग्राम सभा अध्यक्ष हनुमंत गंटल ने की है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here