मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
= पहले से शादीशुदा जोड़ों को दिलाया गया ₹35,000 का लाभ!
= 27 मार्च 2025 के सामूहिक विवाह कार्यक्रम पर गंभीर सवाल, कमीशनखोरी और विभागीय मिलीभगत के आरोप,
मुंगेली/लोरमी |- छत्तीसगढ़ शासन की गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अब मुंगेली जिले के लोरमी क्षेत्र में गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की लोरमी परियोजना क्रमांक-2 के तहत 27 मार्च 2025 को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस कार्यक्रम में कई ऐसे जोड़ों को शामिल किया गया जो पहले से शादीशुदा थे, लेकिन कागजों में उन्हें “प्रथम विवाह” दर्शाकर दोबारा फेरे दिलाए गए और योजना के तहत मिलने वाली ₹35,000 की सहायता राशि दिलाई गई।
यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी योजना के नाम पर धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
👉 27 मार्च का सामूहिक विवाह कार्यक्रम बना विवाद का केंद्र,
लोरमी क्षेत्र में आयोजित 27 मार्च 2025 के सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर अब पूरे इलाके में चर्चा और विवाद का माहौल बन गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यक्रम में शामिल कुछ जोड़े पहले से शादीशुदा थे, लेकिन दस्तावेजों में उन्हें अविवाहित दिखाकर दोबारा सामूहिक विवाह में शामिल किया गया।
बताया जा रहा है कि ऐसे जोड़ों को दुबारा फेरे दिलाकर योजना का लाभ दिलाने का रास्ता तैयार किया गया, जिससे उन्हें ₹35,000 की आर्थिक सहायता प्राप्त हो सके।
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल योजना के नियमों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला भी माना जाएगा।
👉₹35,000 की सहायता राशि में कथित कमीशनखोरी,
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत पात्र जोड़े को ₹35,000 की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
लेकिन स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि इस राशि में से ₹2,000 से ₹5,000 तक की कथित अवैध वसूली की जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई मामलों में लोगों से पहले ही पैसे लेकर उन्हें सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल कराने का भरोसा दिया जाता है।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीब परिवारों के साथ आर्थिक शोषण का मामला बन सकता है।
👉 आंगनबाड़ी नेटवर्क और विभागीय सिस्टम पर सवाल,
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर, सेक्टर प्रभारी और परियोजना कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
क्योंकि लाभार्थियों के चयन से लेकर —
.दस्तावेज तैयार करने
.पात्रता का सत्यापन
.प्रथम विवाह का प्रमाण पत्र
.योजना की स्वीकृति
इन सभी प्रक्रियाओं में महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे में यदि गड़बड़ी हुई है तो यह केवल किसी एक कर्मचारी की गलती नहीं बल्कि पूरे विभागीय सिस्टम की जवाबदेही का मामला बनता है।
👉 ग्राम धरमपुरा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पर भी उठ रहे सवाल,
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत धरमपुरा, विकासखंड लोरमी की परियोजना क्रमांक-2 के आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक-01 की कार्यकर्ता चंद्रिका खाण्डे (पति – कन्हैया खाण्डे) का नाम भी चर्चा में सामने आ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कथित तौर पर पहले से शादीशुदा जोड़ों को योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे पैसे लेकर सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल कराया गया।
हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि निष्पक्ष जांच होती है तो इस मामले में कई और तथ्य सामने आ सकते हैं।
👉 “प्रथम विवाह प्रमाण पत्र” पर भी उठे सवाल,
विभागीय कार्यालय में चर्चा के दौरान एक अधीक्षक स्तर के अधिकारी ने कहा कि प्रथम विवाह का प्रमाण पत्र सरपंच द्वारा जारी किया जाता है, इसलिए जिम्मेदारी सरपंच की होगी।
लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि —
यदि प्रमाण पत्र गलत था
तो दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया?
क्या विभाग ने जांच की?
या फिर बिना जांच के ही योजना का लाभ दे दिया गया?
👉 जिन अपात्र हितग्राहियों के नामों को लेकर उठे सवाल,
स्थानीय स्तर पर जिन मामलों को लेकर चर्चा सामने आई है, उनमें लोरमी परियोजना क्रमांक-2 के सेक्टर से जुड़े कुछ जोड़ों के नाम बताए जा रहे हैं।
बताए जा रहे नाम इस प्रकार हैं —
कार्यालय – महिला एवं बाल विकास विभाग परियोजना क्रमांक-2 लोरमी,
1- श्रद्धा सेन – कुलदीप सेन,
2-ईशा जायसवाल – वीरु जायसवाल,
3-ज्योति दिनकर – दीपक मोहले,
4- पायल बंजारे – मनेन्द,
5-रितु पतले – दुर्गेश कुर्रे,
6-सुनीता कुमारी – गोविंद कुर्रे,
7- काजल बंजारे – जैयंत जांगड़े,
8- शिवानी बंजारे – हामेश कुमार जोशी,
9- अंजिता बघेल – पृथ्वी सिंह घृतलहरे,
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों की संख्या और भी हो सकती है, जो केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी।
👉अधिकारियों की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल,
जब इस पूरे मामले में परियोजना अधिकारी,,रेखा दुआ,, से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने इसे पूर्व परियोजना अधिकारी “राजेन्द कुमार गेंदले” के कार्यकाल का मामला बताया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि —
यदि मामला पुराने कार्यकाल का था
तो अब तक जांच क्यों नहीं हुई?
मामले की पड़ताल के दौरान संबंधित सुपरवाइजर ने भी अनभिज्ञता जताई, जबकि जिला कार्यक्रम अधिकारी संजुला शर्मा से संपर्क करने का प्रयास भी सफल नहीं हो सका।
👉उपमुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में मामला,
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि लोरमी क्षेत्र छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक अरुण साव का विधानसभा क्षेत्र है।
ऐसे में यदि योजना में गड़बड़ी हुई है तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
👉मीडिया में खुलासे के बाद प्रशासन की परीक्षा,
मामला मीडिया में सामने आने के बाद अब पूरे जिले की नजर मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार पर टिकी हुई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करता है तो —
फर्जी विवाह
फर्जी दस्तावेज
अपात्र लाभार्थी
कमीशनखोरी
जैसे कई बड़े मामलों का खुलासा हो सकता है।
👉कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला,
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है —
“गरीब बेटियों के नाम पर चल रही योजना में यदि फर्जी विवाह कराकर सरकारी पैसा निकाला जा रहा है तो यह बेहद गंभीर मामला है। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीब परिवारों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।”
कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
👉बड़ा सवाल,
अब पूरे लोरमी क्षेत्र में एक ही सवाल गूंज रहा है —
क्या गरीब बेटियों के नाम पर सरकारी योजना का दुरुपयोग किया गया?
क्या फर्जी फेरों के जरिए सरकारी राशि निकाली गई?
क्या विभागीय कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था?
और सबसे बड़ा सवाल —
क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी केवल कागजी कार्रवाई में ही सिमट जाएगा?
फिलहाल यह पूरा मामला जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा में है।
यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कन्या विवाह योजना से जुड़े इस कथित “फर्जी फेरे” मामले में कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।



