मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मुंगेली/लोरमी। ग्राम पंचायत सरईपतेरा में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी टंकी के एक साल से बंद पड़े होने और ग्रामीणों के पानी संकट से जूझने की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है। खबर के प्रकाशन के महज 5 दिनों के भीतर ही पीएचई विभाग द्वारा टंकी के जीर्णोद्धार और मरम्मत कार्य की शुरुआत कर दी गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि यदि समय रहते जिम्मेदार विभाग सक्रिय रहता तो ग्रामीणों को एक वर्ष तक पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत सरईपतेरा में करोड़ों रुपये की लागत से जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी का निर्माण किया गया था, जिसका उद्देश्य गांव के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी यह टंकी लगभग एक वर्ष तक बंद पड़ी रही और ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाया।
खबर में यह भी सामने आया था कि टंकी को एक बार चालू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन उसी दौरान टंकी से भारी मात्रा में पानी का रिसाव होने लगा, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। इसके बाद विभाग द्वारा टंकी को बंद कर दिया गया और लंबे समय तक इसकी सुध लेने की कोई कोशिश नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मीडिया दैनिक किरणदूत न्यूज द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से नहीं उठाया जाता तो शायद यह टंकी आज भी बंद पड़ी रहती और गांव के लोग पानी के लिए भटकते रहते।
👉निरीक्षण के बाद शुरू हुआ सुधार कार्य,
खबर प्रकाशित होने के बाद पीएचई विभाग के अधिकारी और तकनीकी टीम सरईपतेरा पहुंचे और पानी टंकी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टंकी में आई तकनीकी खामियों और रिसाव की समस्या की पुष्टि हुई, जिसके बाद विभाग ने तत्काल जीर्णोद्धार और मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।
बताया जा रहा है कि विभाग द्वारा टंकी की संरचना की मरम्मत, रिसाव को ठीक करने, पाइपलाइन की जांच तथा अन्य तकनीकी सुधार का कार्य शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही जल्द से जल्द टंकी को चालू कर गांव में नल जल योजना के तहत जल आपूर्ति शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
👉विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल,
हालांकि इस पूरे मामले ने पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब टंकी का निर्माण कार्य एक वर्ष पहले पूरा हो चुका था, तो आखिर इतने लंबे समय तक इसे बंद क्यों रखा गया?
यदि टंकी में तकनीकी खामियां थीं, तो उन्हें तुरंत दूर क्यों नहीं किया गया? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का लाभ ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंच पाया?
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना में कई स्थानों पर निर्माण कार्य तो कर दिया गया, लेकिन उसके संचालन और गुणवत्ता की सही तरीके से निगरानी नहीं की गई। इसका खामियाजा सीधे तौर पर गांव के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
👉खबर के बाद बढ़ी प्रशासनिक सक्रियता,
स्थानीय लोगों का कहना है कि मीडिया दैनिक किरणदूत न्यूज में खबर सामने आने के बाद ही विभाग की सक्रियता बढ़ी और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समस्या को गंभीरता से लिया। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि समय रहते विभागीय अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते, तो ग्रामीणों को एक साल तक पानी के संकट से जूझना नहीं पड़ता।
👉ग्रामीणों को अब जल्द पानी मिलने की उम्मीद,
फिलहाल टंकी के जीर्णोद्धार कार्य शुरू होने से सरईपतेरा के ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब जल्द ही उनके घरों के नलों से पानी बहना शुरू होगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस बार कार्य सही तरीके से पूरा किया गया और टंकी चालू हो गई, तो गांव के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
हालांकि लोगों का यह भी कहना है कि केवल मरम्मत कार्य शुरू कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि टंकी पूरी तरह दुरुस्त हो और भविष्य में फिर से ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
अब ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नजर इस बात पर टिकी है कि कब तक मरम्मत कार्य पूरा होता है और कब सरईपतेरा के घरों तक नल के माध्यम से पानी पहुंचना शुरू होता है।
यदि इस बार भी योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई, तो यह न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि ग्रामीणों के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास को भी कमजोर करेगा।



