देवस्नान पूर्णिमा से हरिशयन एकादशी तक धार्मिक आस्था, परंपरा और संस्कृति का भव्य संगम; पुरी की तर्ज पर होंगे आयोजन
रायगढ़। आगामी श्री जगन्नाथ रथोत्सव 2026 को भव्य, व्यवस्थित एवं श्रद्धामय स्वरूप देने के उद्देश्य से श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर परिसर में एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक में ट्रस्ट के ट्रस्टी, कार्यकर्ता, उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति, उत्कलिका, स्पोर्ट्स समिति तथा पंडित भवानी शंकर षड़ंगी विद्यालय के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस दौरान 29 जून से 25 जुलाई तक आयोजित होने वाले धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा करते हुए विभिन्न जिम्मेदारियां तय की गईं।
बैठक में यह संकल्प लिया गया कि इस वर्ष का रथोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक वैभव और जनभागीदारी के स्तर पर भी ऐतिहासिक बनाया जाएगा।
29 जून को देवस्नान पूर्णिमा, विशाल भंडारे के साथ होगा महोत्सव का शुभारंभ
श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन ट्रस्टी दिनेश कुमार षड़ंगी ने बताया कि 29 जून को देवस्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा का दिव्य स्नान अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन होगा।
इस वर्ष विशेष आकर्षण यह रहेगा कि पुरी से आमंत्रित कारीगर एवं सेवायत श्रीमंदिर पुरी की पारंपरिक विधि से महाप्रसाद तैयार करेंगे। श्रद्धालुओं को पुरी की आध्यात्मिक परंपरा का अनुभव कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है।
संध्या बेला में ओडिसी नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी होगी, जो ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत करेगी।
15 दिनों तक अनसर गृह में रहेंगे महाप्रभु
देवस्नान पूर्णिमा के पश्चात भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा 15 दिनों के लिए अनसर गृह में विराजमान रहेंगे। मान्यता है कि दिव्य स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और इस अवधि में उनकी विशेष सेवा, उपचार एवं गुप्त अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
इस दौरान आम श्रद्धालुओं के दर्शन बंद रहेंगे तथा परंपरागत विधियों के अनुसार सेवाएं संचालित की जाएंगी।
14 जुलाई को होगा नेत्रोत्सव और नवयौवन दर्शन
15 दिवसीय अनसर अवधि के बाद 14 जुलाई को नेत्रोत्सव एवं नवयौवन दर्शन का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर महाप्रभु पुनः भक्तों को दर्शन देंगे। पुष्प श्रृंगार से सुसज्जित भगवान का दिव्य रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
भगवान को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा तथा भक्तों को नवयौवन स्वरूप के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा।
16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा, राजपरिवार निभाएगा छेरा पहरा की परंपरा
16 जुलाई को बहुप्रतीक्षित रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ पारंपरिक पहंडी विधि के साथ होगा। विधि-विधानपूर्वक महाप्रभु को रथ पर विराजमान कराया जाएगा। रायगढ़ राजपरिवार द्वारा वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार छेरा पहरा की रस्म निभाई जाएगी। इस परंपरा में राजपरिवार के सदस्य स्वर्ण झाड़ू से रथ की सफाई कर यह संदेश देते हैं कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं।
17 जुलाई को नगर भ्रमण के साथ गुंडिचा यात्रा
रथयात्रा के अगले दिन 17 जुलाई को गुंडिचा यात्रा एवं नगर भ्रमण निकाला जाएगा। यात्रा मोतीमहल से प्रारंभ होकर चांदनी चौक, सोनारपारा होते हुए गांजा चौक स्थित मौसी घर पहुंचेगी।
मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत, भजन-कीर्तन, पुष्पवर्षा एवं प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाएगी।
24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा के साथ होगी महाप्रभु की वापसी
गुंडिचा मंदिर में प्रवास के पश्चात 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा (वापसी रथयात्रा) निकाली जाएगी। यह यात्रा गांजा चौक से प्रारंभ होकर हटरी चौक, गद्दी चौक, पैलेस रोड एवं चांदनी चौक मार्ग से होते हुए पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी।
इस दौरान भी हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
25 जुलाई को सोनाभेष और हरिशयन एकादशी का दिव्य आयोजन
रथोत्सव का समापन 25 जुलाई को सोनाभेष एवं हरिशयन एकादशी के भव्य आयोजन के साथ होगा। इस दिन भगवान जगन्नाथ का स्वर्णाभूषणों, पाट वस्त्रों तथा दिव्य आयुधों से अलौकिक श्रृंगार किया जाएगा।
विशेष परंपरा के अनुसार भगवान को केवल रसगुल्ले का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद महाप्रभु चार माह के शयन काल में प्रवेश करेंगे।
हरिशयन एकादशी का धार्मिक महत्व
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सनातन परंपरा में प्रत्येक शुभ कार्य भगवान विष्णु के स्मरण और आवाहन से प्रारंभ होता है। हरिशयन एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए इस अवधि में विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर भगवान के जागरण के साथ ही पुनः विवाह एवं अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।
आस्था, परंपरा और संस्कृति का बनेगा महापर्व
बैठक में उपस्थित सभी संगठनों के पदाधिकारियों ने रथोत्सव को सफल बनाने के लिए सामूहिक सहभागिता का संकल्प लिया। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष का जगन्नाथ महोत्सव धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सेवा गतिविधियों और जनसहभागिता के माध्यम से रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह आयोजन शहर के सबसे बड़े आध्यात्मिक उत्सवों में से एक बनने जा रहा है।



