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नाबालिग बेटी के मामले में थाना चिल्फी की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल: कांग्रेस ने खोला मोर्चा, जिला अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने थाना प्रभारी के निलंबन की मांग की, विद्यानंद चंद्राकर बोले— “यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदारों पर हो कड़ी कार्रवाई”

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मुंगेली/लोरमी-। मुंगेली जिले के थाना चिल्फी से जुड़े एक नाबालिग लड़की के कथित अपहरण मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद कांग्रेस भी खुलकर मैदान में उतर आई है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुंगेली पुलिस अधीक्षक से थाना चिल्फी के थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं जनपद पंचायत लोरमी के सभापति एवं कांग्रेस नेता विद्यानंद चंद्राकर ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी अधिकारियों पर कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है।

ग्राम धरमपुरा निवासी हरीश लहरे ने अपनी नाबालिग पुत्री के कथित अपहरण प्रकरण में थाना चिल्फी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री तथा भारत सरकार के गृह सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में एफआईआर दर्ज करने में देरी, पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं करने, मेडिकल परीक्षण नहीं कराने, कथित रिश्वत मांगने तथा जातिसूचक गाली-गलौज जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

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✍️ एक माह तक एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ता हरीश लहरे का कहना है कि उन्होंने अपनी नाबालिग पुत्री के कथित अपहरण की सूचना समय पर थाना चिल्फी में दी थी, लेकिन लगभग एक माह तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उनका आरोप है कि उन्हें लगातार थाने के चक्कर लगाने पड़े और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही अपराध दर्ज किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अपराध दर्ज होने के बाद भी आवश्यक गंभीर धाराएं नहीं लगाई गईं।

✍️ पॉक्सो और मेडिकल परीक्षण को लेकर गंभीर सवाल

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पीड़िता नाबालिग होने के बावजूद पॉक्सो अधिनियम के तहत अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई तथा उसका मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया। शिकायतकर्ता ने इसे विवेचना की गंभीर त्रुटि बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

✍️ बिना जानकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप

हरीश लहरे ने अपने आवेदन में कहा है कि वे और उनका परिवार अशिक्षित हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने उनसे बिना पूरी जानकारी दिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए। बाद में उन्हें पता चला कि उन दस्तावेजों में ऐसी बातें लिखी गई थीं जिनकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

✍️ 25 हजार की कथित रिश्वत मांगने का आरोप

शिकायत में कुछ व्यक्तियों पर स्वयं को पत्रकार बताकर कथित रूप से 25,000 की मांग करने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनसे कहा गया कि उक्त राशि थाना प्रभारी तक पहुंचाने पर ही कार्रवाई होगी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कराने की मांग की है।

✍️ जातिसूचक गाली-गलौज और समझौते का दबाव बनाने का आरोप

आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि थाना परिसर के बाहर शिकायतकर्ता के साथ अश्लील गाली-गलौज की गई तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए समझौते का दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की मांग की है।

✍️ विद्यानंद चंद्राकर बोले— निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो

जनपद पंचायत लोरमी के सभापति एवं कांग्रेस नेता विद्यानंद चंद्राकर ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं और पीड़िता नाबालिग है तो पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई का परीक्षण किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस द्वारा आवश्यक कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कथित रिश्वत मांगने के आरोपों की भी स्वतंत्र जांच कराने तथा थाना स्तर पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की मांग की।

✍️ जिला कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने थाना प्रभारी के निलंबन की मांग की

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप इतने गंभीर हैं तो जांच प्रभावित न हो, इसके लिए थाना चिल्फी के थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बनाए रखना सरकार और पुलिस विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी हुई है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून अत्यंत स्पष्ट है और ऐसे मामलों में हर कदम संवेदनशीलता एवं विधिक प्रक्रिया के अनुरूप उठाया जाना चाहिए। यदि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में सच्चाई है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

✍️ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने टिप्पणी करने से किया इनकार

इस मामले में जब मुंगेली की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने इस विषय पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पुलिस विभाग की ओर से अब तक मामले के आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

✍️ वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला

शिकायतकर्ता ने एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी, विवेचना की प्रक्रिया, पॉक्सो अधिनियम के पालन, मेडिकल परीक्षण नहीं कराने, कथित रिश्वत मांगने, सीसीटीवी फुटेज की जांच तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका सहित पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामला अब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

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