Home Blog डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन : जनहित में सुशासन का नया अध्याय

डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन : जनहित में सुशासन का नया अध्याय

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   विष्णु प्रसाद वर्मा
  सहायक संचालक, जनसंपर्क

रायपुर,

राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण घटक है। भूमि संबंधी मामलों की जटिलताओं को समाप्त करने, सरकारी तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग द्वारा कई बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। ये सुधार न केवल प्रक्रियाओं को सुगम बना रहे हैं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्याओं का समयबद्ध निराकरण भी सुनिश्चित कर रहे हैं। डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन का अर्थ है ज़मीन और राजस्व से जुड़े कामों को ऑनलाइन, आसान और तेज़ बनाना। इसके तहत स्वतः नामांतरण (ऑटोमैटिक म्युटेशन), ऑटो डायवर्सन, डिजिटल ऋण पुस्तिका, व्हाट्सएप सूचनाएं और ऑनलाइन ई-कोर्ट जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

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डिजिटल प्रणाली से सुगम हुआ रिकॉर्ड प्रेषण

02 अप्रैल 2025 को जारी विशेष आदेश के तहत अब सभी भौतिक दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। भारसाधक अधिकारी को सत्यापनकर्ता का दायित्व सौंपते हुए अब समस्त राजस्व रिकॉर्ड ई-प्रणाली के माध्यम से मंगाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल से रिकॉर्ड के त्वरित संप्रेषण की सुविधा मिली है, जिससे कागजी औपचारिकताओं में होने वाला विलंब समाप्त हो गया है और प्रकरणों के निराकरण में गति आई है।

कृषि भूमि की अदला-बदली हुई आसान

कृषकों और भू-स्वामियों को अपनी सुविधा अनुसार कृषि भूमि की परस्पर अदला-बदली करने का अधिकार संहित के तहत प्राप्त है। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और स्पष्ट बनाने के लिए 21 अक्टूबर 2025 को नए मार्गदर्शी निर्देश जारी किए गए हैं। इससे किसानों को अपनी ज़मीन के प्रबंधन में काफी सहूलियत मिल रही है।

त्रुटि सुधार प्रक्रिया का सरलीकरण

अक्सर राजस्व अभिलेखों में लिपिकीय या मामूली त्रुटियों (जैसे नाम, जाति, पता, या फसल प्रविष्टि) के कारण भू-स्वामियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। 19 जुलाई 2024 की अधिसूचना के माध्यम से इन त्रुटियों के त्वरित सुधार हेतु सीधे तहसीलदार को सशक्त बनाया गया है। इस फैसले ने अदालती चक्करों और समय की बर्बादी को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।

अवैध प्लाटिंग पर कड़ी नकेल

जनवरी 2026 में राजस्व विभाग ने अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी किए। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति अब अवैध प्लाटिंग के खिलाफ समुचित और त्वरित कानूनी कार्यवाही कर रही है, जिससे आम खरीदारों के हितों की रक्षा हो रही है।

पुराने परिपत्रों का निरस्तीकरण

प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रासंगिक और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 23 जुलाई 2024 के आदेश द्वारा नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन तथा आवंटन से संबंधित 2019, 2020 और 2022 के पूर्व परिपत्रों एवं निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है। डिजिटल ई-प्रणाली, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और त्वरित निवारण की इस नीति ने राज्य के राजस्व प्रशासन को एक नई दिशा दी है। यह कदम सुशासन की दिशा में एक सशक्त और जन-हितैषी प्रयास सिद्ध हो रहा है।

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