मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
= कई गांवों में लंबे समय से शराब बिकने की शिकायत, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और आबकारी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की,
= थाना प्रभारी से शराब बिक्री के संबंध में संपर्क का प्रयास, जवाब देने से बचते नजर आये थाना प्रभारी; अब वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मुंगेली/लोरमी। चिल्फी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में लंबे समय से कथित रूप से अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से होने की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों में खुलेआम अवैध शराब उपलब्ध होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मामला अब केवल अवैध शराब बिक्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कुछ स्थानीय लोगों द्वारा चिल्फी थाना प्रभारी रघुवीर लाल चंद्रा की कथित भूमिका और संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, थाना प्रभारी पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
👉 इन गांवों में अवैध शराब बिक्री की शिकाय,
ग्रामीणों से मिली शिकायत के अनुसार चिल्फी थाना क्षेत्र के चिल्फी, गोल्हापारा, खपरी, सहसपुर, डुमरहा, परदेशिया, सेनगुड़ा, हरदी, खेकतरा, दाउकापा, नथेलापारा, बोडतरा, जोतपुर, पथर्रा, फुलवारी, रजपालपुर, धरमपूरा, गातापार, बैजलपुर, घाठापानी, बरियारपुर और चकला सहित आसपास के कई गांवों में कथित रूप से अवैध शराब की बिक्री होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन शिकायतों में सच्चाई है तो केवल शराब बेचने वाले कुछ लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय यह पता लगाना भी जरूरी है कि शराब की आपूर्ति कहां से हो रही है और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
👉 थाना स्तर पर कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी,
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध शराब की बिक्री के कारण गांवों का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर शराब आसानी से उपलब्ध होने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं तो थाना स्तर पर नियमित दबिश, जब्ती, प्रकरण दर्ज करने और शराब के स्रोत तक पहुंचने की कार्रवाई होनी चाहिए।
👉 थाना प्रभारी से संपर्क का प्रयास, जवाब नहीं मिलने का दावा,
समाचार के संबंध में चिल्फी थाना प्रभारी रघुवीर लाल चंद्रा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। कॉल किए जाने के साथ ही थाना पहुंचकर भी उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई।लेकिन थाना प्रभारी ने मामले पर कोई जवाब नहीं दिया और अपने कक्ष में चले गए।
हालांकि, समाचार प्रकाशित होने के बाद थाना प्रभारी अथवा पुलिस विभाग अपना पक्ष प्रस्तुत करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा ।
👉क्या केवल धारा 151 की कार्रवाई होगी?,
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिस अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करती है तो वह कार्रवाई कितनी गंभीर होगी?
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि कहीं केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करके मामले को औपचारिकता तक सीमित तो नहीं कर दिया जाएगा? अथवा यदि अवैध शराब की बिक्री, परिवहन, भंडारण अथवा कब्जे के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की लागू धाराओं के तहत वास्तविक प्रकरण दर्ज किया जाएगा? या फिर कानून के अनुसार कार्रवाई का स्वरूप बरामद शराब की मात्रा, शराब की प्रकृति, बिक्री/परिवहन/भंडारण के साक्ष्य और मामले के अन्य तथ्यों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी मामले में लागू धारा पुलिस एवं आबकारी विभाग की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
👉 क्या अवैध शराब कारोबारियों तक ही सीमित रहेगी कार्रवाई?
यदि पुलिस को किसी गांव में अवैध शराब की बिक्री की जानकारी मिलती है और मौके से शराब बरामद होती है, तो सवाल केवल शराब बेचने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई का नहीं है।
जांच का दायरा आगे बढ़ाकर यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि शराब की सप्लाई कहां से हो रही है?
शराब कौन पहुंचा रहा है? शराब की बिक्री के पीछे कौन लोग हैं?
क्या कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है?
क्या पहले भी इसी मामले में कार्रवाई हुई थी?
पहले की कार्रवाई के बावजूद कारोबार दोबारा कैसे शुरू हुआ?
क्या पुलिस को पूर्व में इसकी जानकारी दी गई थी?
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
👉कांग्रेस नेता विद्यानंद चंद्राकर ने उठाए सवाल,
मामले को लेकर कांग्रेस नेता एवं जनपद पंचायत लोरमी के सभापति विद्यानंद चंद्राकर ने भी पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।उनका आरोप है कि चिल्फी थाना ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि थाना स्तर पर अवैध शराब की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
चंद्राकर ने कथित तौर पर यह भी आरोप लगाया कि संभव है कि थाना प्रभारी द्वारा उच्च अधिकारियों को पैसा पहुंचाया जा रहा हो, इसी वजह से कार्रवाई नहीं हो रही हो। हालांकि, यह एक गंभीर आरोप है और इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इसकी पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
👉 गृह मंत्री विजय शर्मा के बयान से भी बढ़ी कार्रवाई की उम्मीद,
राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा पूर्व में अवैध शराब के मामलों में कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कही गई है। उनके बयान के अनुसार यदि किसी थाना क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री या उससे संबंधित गंभीर लापरवाही सामने आती है और मामला प्रमाणित होता है, तो संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे में अब चिल्फी थाना क्षेत्र से सामने आ रही शिकायतों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
👉क्या वरिष्ठ अधिकारी थाना प्रभारी पर कार्रवाई करेंगे?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शिकायतों की जांच में अवैध शराब बिक्री के आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या वरिष्ठ अधिकारी थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच कराएंगे? या फिर कुछ शराब विक्रेताओं के खिलाफ छोटी कार्रवाई कर मामला शांत कर दिया जाएगा?
ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की जांच थाना स्तर से ऊपर के अधिकारी अथवा स्वतंत्र जांच टीम से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
👉वरिष्ठ अधिकारियों को इन बिंदुओं पर करानी चाहिए जांच,
पूरे मामले की निष्पक्षता के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कम से कम इन बिंदुओं की जांच की जानी चाहिए—
1. पिछले छह महीनों में चिल्फी थाना क्षेत्र में आबकारी अधिनियम के कितने प्रकरण दर्ज हुए?
2. कितनी मात्रा में अवैध शराब जब्त की गई?
3. कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया गया?
4. कितने मामलों में केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई?
5. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित गांवों में कितनी बार दबिश दी?
6. अवैध शराब के स्रोत और सप्लाई चैन की जांच की गई या नहीं?
7. क्या पूर्व में पकड़े गए आरोपियों का कोई नेटवर्क सामने आया?
8. क्या किसी पुलिसकर्मी या कर्मचारी की भूमिका की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची?
9. थाना स्तर पर प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड क्या कहता है?
10. क्या आबकारी विभाग को मामले की जानकारी देकर संयुक्त कार्रवाई की गई?
👉अगर संरक्षण का आरोप सही निकला तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए,
यदि निष्पक्ष जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की अवैध शराब कारोबारियों के साथ मिलीभगत अथवा संरक्षण देने संबंधी ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं यदि जांच में थाना प्रभारी पर लगाए गए आरोप गलत पाए जाते हैं तो पुलिस विभाग को जांच के निष्कर्ष स्पष्ट करते हुए स्थिति सामने रखनी चाहिए।
👉अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें,
चिल्फी थाना क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री की शिकायतों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वरिष्ठ अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे या कुछ छोटे मामलों में कार्रवाई कर पूरे प्रकरण पर पर्दा डाल दिया जाएगा?
क्या पुलिस केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तक सीमित रहेगी?
क्या आबकारी अधिनियम की लागू धाराओं में ठोस प्रकरण दर्ज होगा?
क्या शराब के सप्लाई नेटवर्क तक पुलिस पहुंचेगी?
क्या थाना प्रभारी की कथित भूमिका की भी जांच होगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—यदि जांच में थाना स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या संरक्षण के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो क्या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस विभाग और आबकारी विभाग की आगामी कार्रवाई से ही सामने आएंगे।
फिलहाल अवैध शराब बिक्री और थाना प्रभारी पर संरक्षण के लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।



