मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मुछेल प्राथमिक शाला में SMC गठन पर गंभीर सवाल, मामला कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंचा; पत्रकार एवं पालक हरजीत भास्कर से कथित अभद्रता के बाद DEO कार्यालय के पियून रामकिशोर कैवर्त ने लिखित माफी मांगी, DEO एल.पी. डाहिरे ने भी मौखिक रूप से जताया खेद
मुंगेली/लोरमी। ग्राम मुछेल स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शाला प्रबंधन समिति (SMC) के गठन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया है। समिति गठन की प्रक्रिया में नियमों एवं पारदर्शिता की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ग्राम मुछेल निवासी, पालक एवं पत्रकार हरजीत कुमार भास्कर ने पहले एसडीएम लोरमी और बाद में कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच तथा नियम विरुद्ध पाए जाने पर समिति को निरस्त कर पुनः निर्वाचन कराने की मांग की है।
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब शिकायत से जुड़े घटनाक्रम के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मुंगेली में पत्रकार एवं पालक हरजीत भास्कर के साथ कथित धक्का-मुक्की एवं अभद्र व्यवहार के मामले में DEO कार्यालय में पदस्थ पियून रामकिशोर कैवर्त ने लिखित रूप से माफी मांगी। वहीं शिकायतकर्ता के अनुसार, मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे ने भी मौखिक रूप से माफी मांगते हुए मामले पर खेद व्यक्त किया। इसके साथ ही DEO डाहिरे ने मामले में तीन दिवस के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया है।
👉कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंचा SMC गठन का मामला,
कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत आवेदन का टोकन क्रमांक 18757 है तथा आवेदन की तारीख 11 अगस्त 2026 दर्ज है। शिकायतकर्ता ने आवेदन के साथ 4 अगस्त 2026 को एसडीएम लोरमी के समक्ष प्रस्तुत आवेदन की पावती भी संलग्न की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शासकीय प्राथमिक शाला मुछेल में 3 अगस्त 2026 को शाला प्रबंधन समिति का गठन किया गया, लेकिन समिति गठन के दौरान निर्धारित प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि समिति गठन से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच कराई जाए। यदि जांच में प्रक्रिया नियम विरुद्ध पाई जाती है तो वर्तमान समिति को निरस्त कर सभी पात्र पालकों एवं संबंधित हितधारकों की मौजूदगी में नियमानुसार पुनः निर्वाचन कराया जाए।
👉 3 अगस्त को हुआ था समिति का गठन,
शिकायतकर्ता के अनुसार, 3 अगस्त 2026 को शासकीय प्राथमिक शाला मुछेल में SMC का गठन किया गया था। आरोप है कि समिति गठन से पहले विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के सभी पालकों को पर्याप्त एवं लिखित सूचना नहीं दी गई।
इसके अलावा ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव अथवा अन्य संबंधित हितधारकों को बैठक की जानकारी दिए जाने को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि शाला प्रबंधन समिति किसी सीमित संख्या में लोगों की मौजूदगी में गठित करने के बजाय निर्धारित नियमों के अनुसार सभी पात्र पालकों की सहभागिता और पारदर्शी प्रक्रिया से गठित की जानी चाहिए।
👉 पालकों को सूचना देने की प्रक्रिया पर सवाल,
शिकायत में सबसे प्रमुख मुद्दा पालकों को समिति गठन की बैठक की सूचना देने से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच के दौरान यह देखा जाए कि बैठक से पहले किन-किन पालकों को सूचना दी गई थी, सूचना किस माध्यम से दी गई थी और कितने पालक बैठक में उपस्थित हुए थे।
इसके साथ ही उपस्थिति पंजी, बैठक की कार्यवाही रजिस्टर, समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों के चयन की प्रक्रिया तथा संबंधित अन्य अभिलेखों की जांच की मांग की गई है।
यदि विद्यालय के अभिलेखों से पूरी प्रक्रिया स्पष्ट हो जाती है तो विवाद की वास्तविक स्थिति भी सामने आ सकती है।
👉 एसडीएम लोरमी को 4 अगस्त को दिया था आवेदन,
मामले को लेकर हरजीत कुमार भास्कर ने 4 अगस्त 2026 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, लोरमी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें SMC गठन की प्रक्रिया की जांच कर समिति को निरस्त करने और नियमानुसार पुनः निर्वाचन कराने की मांग की गई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, स्थानीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने मामले को कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत किया। अब मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक जांच और कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
👉 BEO और संकुल समन्वयक की भूमिका पर भी सवाल,
शिकायतकर्ता ने लोरमी विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनीषा पाटले तथा संबंधित संकुल समन्वयक सनंत राजपूत की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले की शिकायत के बाद निष्पक्ष जांच कराने के बजाय विद्यालय के प्रधान पाठक के पक्ष में कार्रवाई किए जाने की स्थिति बन रही थी। शिकायत में अधिकारियों के स्तर से कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और प्रशासनिक जांच के बाद ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
👉 पत्रकार से कथित अभद्रता के बाद मामला और गरमाया,
SMC गठन की शिकायत के बीच 14 अगस्त 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मुंगेली में पत्रकार एवं पालक हरजीत भास्कर के साथ कथित धक्का-मुक्की एवं अभद्र व्यवहार की घटना सामने आई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह SMC गठन से संबंधित शिकायत और जानकारी के सिलसिले में कार्यालय पहुंचा था। इसी दौरान विवाद की स्थिति बनी और उसके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार एवं धक्का-मुक्की की गई।
घटना के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच एवं जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
👉 पियून रामकिशोर कैवर्त ने लिखित माफी मांगी,
इस घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पियून रामकिशोर कैवर्त ने 17 अगस्त 2026 को लिखित माफी पत्र प्रस्तुत किया।
माफी पत्र में रामकिशोर कैवर्त ने घटना पर खेद जताते हुए अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी तथा भविष्य में इस प्रकार का व्यवहार नहीं करने की बात कही।
लिखित माफी सामने आने के बाद शिकायतकर्ता का कहना है कि अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सरकारी कार्यालय में विवाद की स्थिति किन परिस्थितियों में बनी।
👉 DEO एल.पी. डाहिरे ने भी मौखिक रूप से मांगी माफी,
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ता के अनुसार मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे ने भी मौखिक रूप से माफी मांगते हुए घटना पर खेद व्यक्त किया।
इस प्रकार मामले में एक ओर पियून रामकिशोर कैवर्त की लिखित माफी सामने आई है, वहीं दूसरी ओर DEO एल.पी. डाहिरे द्वारा मौखिक रूप से माफी मांगने की बात शिकायतकर्ता ने कही है।
हालांकि मौखिक माफी के बावजूद शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी पत्रकार या पालक के साथ सरकारी कार्यालय में ऐसी स्थिति निर्मित न हो।
👉 DEO ने तीन दिवस में कार्रवाई का दिया आश्वासन,
शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन दिवस के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया है।
अब विभागीय कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग मामले की केवल आपसी माफी तक सीमित रखेगा या घटना की पूरी जांच कर जिम्मेदारी भी तय करेगा।
👉मामला केवल अभद्रता का नहीं, पालकों के अधिकारों का भी,
यह विवाद केवल पत्रकार के साथ कथित अभद्र व्यवहार तक सीमित नहीं है। इसकी मूल वजह ग्राम मुछेल के शासकीय प्राथमिक विद्यालय में SMC गठन को लेकर उठे सवाल हैं।
किसी पालक द्वारा विद्यालय प्रबंधन समिति के गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाना और संबंधित दस्तावेजों की मांग करना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे मामलों में विभाग को शिकायतकर्ता को नियमों एवं अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
यदि समिति का गठन नियमों के अनुरूप हुआ है तो दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। वहीं यदि जांच में नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो नियमानुसार सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक होगी।
👉SMC गठन की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग,
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से समिति गठन की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। इसमें—
– समिति गठन की सूचना और नोटिस,
– बैठक की तारीख एवं समय,
– बैठक की कार्यवाही रजिस्टर,
– उपस्थित पालकों की हस्ताक्षरयुक्त उपस्थिति,
– निर्वाचन अथवा चयन प्रक्रिया,
– अध्यक्ष एवं सदस्यों के चयन का रिकॉर्ड,
– संबंधित आदेश एवं निर्देश की जांच शामिल है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि 3 अगस्त 2026 को गठित समिति नियमों के अनुरूप बनी थी या नहीं।
👉अब प्रशासनिक जांच पर टिकी नजर,
मुछेल प्राथमिक शाला की SMC का मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर कलेक्टर जनदर्शन और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक पहुंच चुका है। एक ओर समिति गठन की शिकायत है, तो दूसरी ओर शिकायत से जुड़े घटनाक्रम में पियून की लिखित माफी और DEO की मौखिक माफी सामने आई है।
अब प्रशासन के सामने दो प्रमुख पहलू हैं—पहला, SMC गठन की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और दूसरा, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हुई कथित घटना की जांच।
यदि दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जाती है तो पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
👉 तीन दिवस के आश्वासन के बाद कार्रवाई का इंतजार,
फिलहाल इस पूरे मामले में कलेक्टर जनदर्शन की शिकायत, SMC गठन पर उठे सवाल, पियून रामकिशोर कैवर्त की लिखित माफी, DEO एल.पी. डाहिरे की मौखिक माफी और तीन दिवस में कार्रवाई का आश्वासन प्रमुख बिंदु हैं।
अब देखना होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है और क्या मुछेल प्राथमिक शाला की SMC गठन प्रक्रिया की भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाती है।
शिकायतकर्ता की मांग है कि मामले को व्यक्तिगत विवाद के रूप में नहीं, बल्कि पालकों की सहभागिता, विद्यालय प्रबंधन समिति की पारदर्शिता और सरकारी कार्यालय में शिकायतकर्ता के साथ व्यवहार—इन तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए देखा जाए।
👉 तीन दिवस में कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी,
शिकायतकर्ता हरजीत कुमार भास्कर ने कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए तीन दिवस के आश्वासन के बाद अब विभागीय कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर SMC गठन की शिकायत एवं संबंधित घटनाक्रम पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मामले को लेकर उग्र आंदोलन एवं भूख हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि शाला प्रबंधन समिति के गठन में पारदर्शिता, पात्र पालकों की सहभागिता और नियमों के पालन से जुड़ी है। साथ ही सरकारी कार्यालय में शिकायतकर्ता के साथ कथित अभद्र व्यवहार की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग भी की जा रही है।
अब तीन दिवस की समयसीमा के बाद शिक्षा विभाग द्वारा क्या कदम उठाया जाता है, इस पर ग्रामीणों, पालकों और शिकायतकर्ता की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन और भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद मामला और तूल पकड़ सकता है।
फिलहाल लिखित और मौखिक माफी के बाद निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं।



