Home Blog बंदूक से राखी तक—संघर्ष की राह से भाईचारे और विश्वास की ओर।

बंदूक से राखी तक—संघर्ष की राह से भाईचारे और विश्वास की ओर।

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🔷 चौगेल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों ने DRG जवानों को बांधी राखी।
🔷 पुनर्वास एवं मुख्यधारा से जोड़ने की पहल को मिला भावनात्मक स्वरूप।

भानुप्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र में रक्षाबंधन के अवसर पर आत्मसमर्पित माओवादियों ने DRG जवानों की कलाई पर राखी बांधकर पर्व मनाया।कभी बंदूक लेकर आमने-सामने रहने वाले हाथ आज विश्वास, भाईचारे और शांति के पवित्र धागे से जुड़े। यह आयोजन हिंसा से मुख्यधारा और हथियार से हुनर की ओर बढ़ते बदलाव का भावुक प्रतीक बना।

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आत्मसमर्पित माओवादी शांति कवाची ने बताया कि उन्होंने पहली बार रक्षाबंधन मनाया और मुख्यमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से स्वयं तैयार की गई राखी DRG जवान की कलाई पर बांधी। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने का अनुभव हो रहा है।

पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को सिलाई, काष्ठ शिल्प, राखी निर्माण सहित विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक आजीविका से जुड़ सकें।

DRG जवान टेकेश्वर हिचामी ने कहा कि पहले दोनों पक्ष बंदूक लेकर आमने-सामने होते थे, लेकिन आज वही हाथ राखी के पवित्र धागे से जुड़े हैं। यह पल विश्वास और शांति की नई शुरुआत का प्रतीक है।

📢 कांकेर पुलिस का संदेश

हथियार छोड़कर हुनर अपनाएं, हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ें। कांकेर पुलिस आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास के माध्यम से हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लौटने का अवसर प्रदान करने की दिशा में कार्यरत है।

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