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सरसीवां में बेलगाम भूमाफिया राज: 10 साल में 15 लाख की जमीन के दाम 6 करोड़ से ऊपर। यहां भूमाफियाओं ने रेरा से भी ऊंचे दामों पर बेच रहें हैं जमीनें।रजिस्ट्री व राजस्व विभाग की मिलीभगत से सरकार को करोड़ो रुपए की हो रही है राजस्व क्षति, बीते 10 साल के रिकॉर्ड की हो जांच।

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सरसीवां – भूमाफियाओं ने सरसीवा में जमीन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है। 2016 में डेढ़ एकड़ जमीन 15 लाख रुपये कीमत पर मिलने वाली जमीन को भूमाफिया अब 6 करोड़ से अधिक में बेचने का खेल बीते 10 से कर रहे हैं। भूमाफियाओं ने सरसीवां के चारों तरफ अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है।

जहां भी जाएं इनके दलाल सक्रिय हो जाते हैं और आपको कम दामों वाली जमीन को भी महंगे में लेना पड़ जाएगा क्यों कि ये भूमाफिया अंदर से एकजुट हो गए हैं। 2016 में ये माफिया 10 लाख रु प्रति एकड़ में जमीन लेकर भोले भाले लोगों से रेरा जैसा पैसा वसूल रहें हैं। इनकी कॉलोनियों में न सड़क की सुविधा न नाली की और न बिजली की फिर भी ये रजिस्ट्री और राजस्व विभाग की मिलीभगत से रेरा से ऊंची कीमत पर धड़ल्ले से प्लॉट बेच रहें हैं।

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जानकारी के अनुसार माफिया बिना रेरा रजिस्ट्रेशन और बिना लेआउट अनुमति के अवैध कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। किसानों से सस्ते में जमीन लेकर उसे छोटे-छोटे प्लॉट में काटकर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है ऐसी खरीदी बिक्री पूरी तरह अवैध है।इस पूरे घोटाले में रजिस्ट्री और राजस्व विभाग की मिलीभगत सामने आ रही है। कम कीमत पर रजिस्ट्री दिखाकर स्टाम्प ड्यूटी चोरी की जा रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो रही है। सरकारी जमीन को भी निजी बताकर बेचे जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बीते 10 साल के रजिस्ट्री, खसरा और नामांतरण रिकॉर्ड की जांच कराई जाए तो बड़ा जमीन घोटाला उजागर हो सकता है।क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से SIT जांच और दोषी अधिकारियों व भूमाफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

संबंधित कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी और निजी जमीनों के कागजों में हेरफेर कर जमीनों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ा दी गई हैं, जिससे आम आदमी के लिए घर बनाना सपना होता जा रहा है।मिली जानकारी के अनुसार पूरे अंचल में भूमाफियाओं ने एक नया तरीका अपनाया है । यहां वर्ष 2015 से अब तक बिना अनुमति, ले-आउट के कृषि जमीन की धड़ल्ले से बिना आवासीय परिवर्तन के कच्चे में प्लॉट खरीदी बिक्री की गई है जो सवालों के घेरे में है इस अवधि के रिकॉर्ड की गहराई से जांच की जाती है तो बड़े खुलासे हो सकते हैं।

गरीब और किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। रजिस्ट्री महंगी होने से खरीदार पीछे हट रहे हैं वहीं रियल एस्टेट कारोबारी इसका फायदा उठा रहे हैं। शादी या इलाज के लिए जमीन बेचने वाले किसान और गरीब परिवार सबसे ज्यादा परेशान हैं।मजबूरी का फायदा उठा कर ये भूमाफिया इनसे औने पौने दामों में जमीन खरीद रहें हैं और बाद में कोई पैसा वाला खरीददार के पास महंगे में बेच रहें हैं।

सरसीवां नगर के एक नागरिक ने बताया कि 2016 में पैसे की जरूरत पड़ने पर एक भूमाफिया ने इनसे डेढ़ एकड़ जमीन को मात्र 15 लाख में खरीदी थी अब वहीं भूमाफिया इसी जमीन को टुकड़ों टुकड़ों में 4 लाख डिसमिल के भाव में अर्थात डेढ़ एकड़ जमीन को 6 करोड़ में बेच रहा है।मतलब की इन 10 सालों में भूमाफियाओं ने यहां जमीन की कीमतें 40 गुना बढ़ा दी जबकि जमीन की इतनी कीमतें राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में नहीं बढ़ी है इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि भू माफियाओं ने पूरे सांठगांठ कर जमीन की कीमतें आसमान स्तर पर बढ़ा दी है।

जानकारी के मुताबिक रायपुर,बिलासपुर में जमीन की कीमतें हर साल 10 से 20 फीसदी ही बढ़ती है।इस पूरे मामले में रायपुर बिलासपुर के जमीन कारोबारियों ने बताया कि ग्रामीण अंचल होने के बाद भी 10 साल में 40 गुना कीमत बढ़ाना बहुत ही चिंता का विषय है।इस पर प्रशासनिक स्तर पर रोक लगाया जाना चाहिए ताकि आगे जमीन की कीमत न बढ़ें। इन्होंने आगे कहा कि अंचल के लोगों को चाहिए कि जमीन खरीदने में जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। कोई भूमाफिया अपनी जमीनें ऊंची कीमत पर बेच रहा है तो कम कीमत में जमीन की मांग करके 3 से 6 माह बात करके छोड़ दें यदि यहीं तरीका अंचल के हर लोग करें तो जमीन की कीमतें कम हो जाती है।

स्थानीय और अंचल के नागरिकों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर भूमाफियाओं और संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए, कच्चे और टुकड़ों पर बेचे गए खसरों की खरीदी बिक्री पर पूर्णतः रोक लगाई जाए,गलत तरीके से हुई रजिस्ट्री – नामांतरण निरस्त किए जायें और गाइडलाइन दरों का पुनर्मूल्यांकन कर भूमाफियाओं से राजस्व वसूली की जाएं।

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