रायगढ़, 41वें चक्रधर समारोह की 8वीं संगीत संध्या में कथक विदुषी श्रीमती वासंती वैष्णव एवं उनके शिष्य-शिष्याओं ने शानदार कथक प्रस्तुति से रायगढ़ घराने की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। लय, ताल, भाव और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
रायगढ़ घराने के प्रसिद्ध कथक साधक पंडित फिरतु महाराज की पुत्री एवं प्रमुख शिष्या वासंती वैष्णव ने बाल्यकाल से ही कथक की शिक्षा प्राप्त की। पंडित राममूर्ति वैष्णव एवं पंडित सुनील वैष्णव से भी उन्होंने कथक की बारीकियां सीखीं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली वासंती वैष्णव को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ शासन के चक्रधर सम्मान से सम्मानित किया गया है।
‘गंगा अवतरण’ से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
वासंती वैष्णव ने अपने शिष्य-शिष्याओं ज्योतिश्री वैष्णव, सृष्टि गर्ग, ओजस्विता रॉयल, साँईश्री इजारदार, अनन्या श्रीवास, प्रिंसी तिवारी, प्रभ्नूर कौर सलूजा, सिया छत्रे एवं स्वप्निल बोरकर के साथ ठाकुर वेदमणि सिंह की कालजयी रचना ‘गंगा अवतरण’ से प्रस्तुति का शुभारंभ किया। इसके बाद कलाकारों ने विशुद्ध रायगढ़ घराने की शैली में विलास पारण, कृष्ण लास्य त्रोतकम, कड़क बिजली, चमक बिजली, तत्कार एवं लय बाट प्रस्तुत कर कथक की जटिल लयकारी और नृत्य कौशल का परिचय दिया। अंत में भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित भजन ‘ब्रज के नंद लाला, राधा के साँवरिया’ की भावपूर्ण प्रस्तुति से कार्यक्रम का समापन हुआ।



