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IAS Transfer 2024: कलेक्टर की रिपोर्ट पर सरकार ने किया ट्रांसफर, ऑडी कार में चलने वाली आईएएस को चाहिए VIP सुविधा, ट्रेनी IAS के नखरे

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IAS Transfer 2024: Government transferred on the report of the collector, IAS who travels in Audi car wants VIP facility, trainee IAS is throwing tantrums

मुंबई: महाराष्ट्र कैडर की ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर(IAS officer Pooja Khedkar) अपने रवैये को लेकर सुर्ख़ियों में है. ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर पुणे में तैनात थी. जिनका प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही मध्य महाराष्ट्र के वाशिम जिले में ट्रांसफर कर दिया गया है. पूजा खेडकर की वीआईपी मांग से पुणे कलेक्टर डॉ. सुहास दिवासे(Collector Dr. Suhas Divase) के पत्र के बाद यह कार्रवाई हुई है.

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पूजा खेडकर का ट्रांसफर

इस सम्बन्ध में आदेश जारी किया गया है. आदेश में लिखा है कि 2023 बैच की ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को उनके प्रशिक्षण की शेष समय पूरी करने के लिए वाशिम स्थानांतरित किया गया है. आईएएस पूजा खेडक 30 जुलाई, 2025 तक वहां सुपरन्यूमेरी सहायक कलेक्टर के रूप में काम करेंगी.

पुणे कलेक्टर के शिकायत पर कार्रवाई

दरअसल, 32 वर्षीय ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को मसूरी से ट्रेनिंग के बाद पुणे में बतौर अपर कलेक्टर तैनाती मिली थी. पूजा खेडकर जिला कलेक्टर कार्यालय से वीआईपी मांग करने लगी थी. जो एक ट्रेनी अफसर को नहीं दी जाती है. इससे परेशान होकर पुणे कलेक्टर डॉ. सुहास दिवासे ने अपर मुख्य सचिव मंत्रालय को रिपोर्ट दी. जिसके बाद पूजा खेडकर का ट्रांसफर कर दिया गया.

पूजा खेडकर ने की थी वीआईपी मांग

कलेक्टर डॉ. सुहास दिवासे ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले वॉट्सऐप पर मैसेज भेजकर खुद के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था, सरकारी गाड़ी, लाल बत्ती, नेम प्लेट, आवास और कांस्टेबल की मांग कर रही थीं. जो कि प्रोबेशन पर चल रहे असिस्टेंट कलेक्टर को ये सुविधाएं देना नियमों के अनुरूप नहीं है. इस सम्बद्ध में पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर जो रिटायर्ड आईएएस अधिकारी है ने भी विशेष सुविधाओं के लिए दबाव बनाया.

अपर कलेक्टर के चेंबर पर कब्ज़ा किया

रिपोर्ट में ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर पर पुणे के अपर कलेक्टर अजय मोरे के चेंबर पर कब्ज़ा करने का आरोप है. 18 से 20 जून के बीच अपर कलेक्टर अजय मोरे जब सरकारी काम से मुंबई गए थे. इस दौरान पूजा खेडकर ने कुर्सियां, सोफा, टेबल सहित सभी सामान हटवा कर कब्जा कर लिया था. इतना ही नहीं उनके पूर्व कार्यालय पर अपने नाम का बोर्ड लगा दिया.

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि आईएस ट्रेनी पूजा खेडकर अपने निजी ऑडी कार का इस्तेमाल कर रही हैं. जिसमे महाराष्ट्र सरकार लिखी हुई वीआईपी नंबर प्लेट और लाल-नीली बत्ती लगी हुई है. इतना ही नहीं उन्होंने राजस्व सहायक को उनके नाम का लेटरहेड, विजिटिंग कार्ड, पेपरवेट, नेमप्लेट, रॉयल सील, इंटरकॉम उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

जिसके बाद पुणे कलेक्टर ने अपर मुख्य सचिव सुजाता सैनिक, मंत्रालय को पत्र लिखा और कहा कि ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर पिछले तीन महीने से अधिकारियों को परेशान कर रही हैं और धमकी भी दी. खेडकर को पुणे में अपना प्रशिक्षण जारी रखने की अनुमति देना उचित नहीं है. कलेक्टर सुहास दिवसे की की शिकायत अपर मुख्य सचिव मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए पूजा खेडकर का ट्रांसफर कर दिया.

कौन हैं पूजा खेडकर

ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर ने 2023 बैच की अधिकारी है. UPSC की परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 821 आई थी. पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर पूर्व आईएएस अफसर है. दिलीप खेड़कर राज्य के प्रदूषण विभाग के आयुक्त रह चुके हैं. पूजा खेडकर की माँ डाॅ. मनोरमा खेडकर भलगांव की लोक नियुक्ता सरपंच हैं. पूजा खेडकर ने दृष्टिबाधित श्रेणी से यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की है. इस सम्ब्नध में खुद को दिव्यांग बताते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में याचिका भी दायर की थी. जिसके लिए उन्होंने विकलांगता प्रमाण पत्र जमा किया था. उन्होंने खुद को मानसिक रूप से बीमार बताया. पूजा पर कथित तौर पर आईएएस में शामिल होने के लिए फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने का आरोप है. आईएएस पूजा खेडकर के विकलांगता का मामला भी सुर्ख़ियों में आ गया है.

Trainee IAS के कारनामे

एक कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही नज़र आ जाते हैं। पूजा का किस्सा भी कुछ-कुछ ऐसा ही है। कहा जा रहा है कि ट्रेनी IAS होते ही पूजा ने कायदे और कानून को ही सबसे पहले ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपनी निजी ऑडी कार पर लाल और नीली रंग की बत्ती लगाकर तमाम इलाके में अपना रुआब गांठना शुरू किया। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि पूजा ने अपने ही सीनियर का चैंबर तक छीन लिया। उस चैंबर के बाहर अपने नाम की तख्ती भी ठुकवा दी थी। ये सब होने की खबर जब आला अफसरों तक पहुँची तो पूजा के खिलाफ एक्शन हुआ और सबसे पहले उनका तबादला ही कर दिया गया।

पूजा का कर दिया गया ट्रांसफर

मजे की बात ये है कि पुणे में तैनात ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर ने ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही अलग केबिन और स्टाफ जैसी मांगों को लेकर अच्छा खासा बवाल खड़ा कर दिया। पीटीआई के मुताबिक, पूजा खेड़कर का ट्रांसफर करने वाली सरकारी चिट्ठी में कहा गया है कि 2023 बैच की IAS अधिकारी पूजा खेडकर को उनके प्रशिक्षण की बची हुई मियाद पूरी करने के लिए वाशिम ट्रांसफर किया गया है। और वह 30 जुलाई, 2025 तक वहां सुपर न्यूमेरी सहायक कलेक्टर के तौर पर काम करेंगी, यानी पूजा अब एक वैकल्पिक अधिकारी के तौर पर अपनी ट्रेनिंग पूरी करेंगी।

केबिन, कार और चपरासी की डिमांड

पुणे के कलेक्टर सुहास दीवसे की तरफ से General Administration Department को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जून को ड्यूटी पर आने से पहले ही खेडकर ने नियमों को ठेंगा दिखाते हुए बार-बार मांग की थी कि उन्हें एक अलग केबिन, कार, आवासीय क्वार्टर के साथ-साथ एक चपरासी भी दिया जाए। जबकि उन्हें ये बात पहले ही बताई जा चुकी थी कि प्रोबेशन पीरियड (Probation Period) के दौरान वो ऐसी किसी भी सुविधा की हकदार नहीं होंगी। जिला कलेक्टर ने GAD को भेजी अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात और पूजा खेडकर के हाव-भाव को देखते हुए उन्हें पुणे में अपनी ट्रेनिंग जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

सीनियर अफसर का छीना चैंबर

हद तो तब हो गई थी जब पुणे कलेक्टर कार्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी की नेमप्लेट हटाकर पूजा ने अपनी नेम प्लेट लगवा दी। पूजा पर इल्जाम ये भी है कि 8 से 20 जून 2024 के बीच पूजा खेडकर ने अपर कलेक्टर की इजाजत के बिना कुर्सियां, सोफा, टेबल समेत उनके दफ्तर का तमाम फर्नीचर और सभी सामान बाहर निकाल दिया. इसके बाद राजस्व सहायक को बुलाकर उनके नाम का लेटर हेड, विजिटिंग कार्ड, पेपरवेट, राष्ट्रीय ध्वज, नेमप्लेट, शाही मुहर, इंटरकॉम आदी उपलब्ध कराने का निर्देश दे दिया। ऐसा तब हुआ जब उस अधिकारी ने पूजा को अपने दफ्तर के तौर पर अपना चैंबर इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी। पूजा पर ये भी इल्जाम है कि पुणे आने से पहले पूजा वीआईपी नंबर प्लेट वाली ऑडी कार पर लाल और नीली बत्ती लगाकर घूमती रहीं। इसके लिये उन्होंने अपनी निजी ऑडी कार का इस्तेमाल किया। उस कार पर लाल रंग से महाराष्ट्र शासन भी लिखवा लिया। जबकि किसी भी सरकारी अफसर को हूटर, बत्ती या फिर ऐसी नंबर प्लेट सिर्फ सरकारी गाड़ी पर ही लगाने की इजाजत होती है।

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