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एक गांव ऐसा भी जँहा लकड़ी के बने टॉवर से होता है फोन पे बात

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MCB से भगवान दास की रिपोर्ट

कोरिया/आज के इस आधुनिक युग की बात करें तो लोग चाँद और सूरज पर पहुँच रहे हैं लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य के जिला कोरिया के सोनहत विकासखण्ड का एक गांव ऐसा भी है जँहा मोबाइल टॉवर तो लगा हुआ लेकिन नेटवर्क नही रहता जँहा के लोग बोला जाए तो आज से लगभग 3 दशक पीछे की जिंदगी जी रहे है जी हाँ अपने सही पढ़ा हम बात कर रहें है रामगढ़ की जो कि कोरिया जिला मुख्यालय से दूरी महज 50किमी है, जिसके आस पास के कई ऐसे गांव है जँहा पर मोबाइल का नेटवर्क ही नही है वैसे तो मोबाइल कंपनी का टॉवर तो लगा है लेकिन नेटवर्क का नामों निशान नही है जिससे ग्रामीणों को अपने रिश्तेदारों संबंधियों के साथ अन्य किसी काम के लिए यदि कहीं जरूरी बात करना हो तो मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण वे बेबस और लाचार हो जाते हैं।

 

*जुगाड़ से चलता है काम*

जुगाड़ भारत में इस नाम का बहुत महत्व है इसी जुगाड़ नामक शब्द से लोग आसानी से छोटे व सस्ते सामानों से बड़े बड़े व महँगे मशीनों का कार्य बड़े आसानी से कर लेते हैं कुछ इसी जुगाड़ नामक शब्द से जुगाड़ कर गांव के बच्चों नें गांव में ही खेत खलियानों पर कई जगह पर लकड़ी का टावर तैयार किया है जँहा पर गांव के ग्रामीणों को यदि मोबाइल से किसी से बात करना होता है तो उसी लकड़ी के बने टावर का इस्तेमाल कर फोन से बात करते है और बड़े सहजता से फ़ोन पर बात भी हो जाती है, दरसअल जँहा जँहा पर लकड़ी के टावर बने हुए हैं वहाँ पर जिओ कंपनी के टावर का नेटवर्क आता है और इसीलिए गांव के बच्चों के द्वारा वँहा पर अस्थायी तौर पर लकड़ी के टॉवर गाड़ दिए गए हैं जिस पर बकायदा मोबाइल स्टैंड भी लगा हुआ है जिससे उस मोबाइल स्टैंड पर मोबाइल रख कर फोन से बातें हो जाती है।

 

*हम आज भी लगभग 3 दशक पीछे की जिंदगी जी रहे हैं- ग्रामीण जन*

 

रामगढ़ के ग्रामीणों का कहना है कि हम आज भी लगभग 3 दशक पीछे की जिंदगी जीने को मजबूर हैं क्योंकि यंहा पर मोबाइल नेटवर्क नही पकड़ने के कारण हम बुजुर्गों के साथ साथ हमारी युवा पीढ़ी भी 3 दशक पीछे चल रही है क्योंकि आज पढ़ाई भी ऑनलाइन होने लगी है और हमारे बच्चों पर भी इसका असर दिखता है क्योंकि जब मोबाइल नेटवर्क ही नही पकड़ेगा तो बच्चे ऑनलाइन पढ़ेंगे कैसे ।

 

*राशन के लिए थम्ब मशीन में अगूंठा लगाने 5 से 7 किमी दूर पहाड़ पर जाते हैं ग्रामीण*

 

इस मोबाइल नेटवर्क की परेशानी केवल मोबाइल से बात करने तक ही सीमित नही है बल्कि ग्रामीणों को अपना पेट भरने के लिए भी काफी मसक्कत करनी पड़ती है, बात राशन की हो रही है जो उचित मूल्य की दुकान पर दी जाती है लेकिन गांव में मोबाइल नेटवर्क नही होने के कारण लोगो को गांव से 5 से 7 किमी दूर पहाड़ पर जाना पड़ता है जँहा चिन्हित स्थान पर नेटवर्क बताता है वंही थम्ब मशीन में अंगूठा लगाकर ग्रामीण आते हैं और दूसरे दिन उचित मूल्य के दुकान से राशन प्राप्त करते हैं।

उक्त मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझते ग्रामीणो नें शासन प्रशासन से अपील की है इस समस्या का निराकरण करें।

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