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कई ठिकानों पर CBI की छापेमारी; विदेश पिस्तौल सहित हथियार बरामद, पश्चिम बंगाल के संदेशखाली मामले में एक्शन

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CBI raids at several locations; Weapons including foreign pistol recovered, action in Sandeshkhali case of West Bengal

पश्चिम बंगाल में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने शुक्रवार को संदेशखाली के सरबेरिया इलाके में छापा मारा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां से CBI की 10 सदस्यीय टीम ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता हफीजुल खान के रिश्तेदार के घर से विदेशों में बने हथियार, गोला-बारूद और बम बरामद किए हैं। CBI टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ इलाके में पहुंची और घर में छापामारी की कार्यवाही की। छापेमारी अभी भी जारी है।

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जांच एजेंसी के अधिकारी गुप्त सूचना प्राप्त होने के बाद मौके पर पहुंचे थे। वे अपने साथ बम का पता लगाने के लिए स्कैनिंग मशीन भी ले गए थे। इससे पहले भी CBI की 10 सदस्यीय टीम संदेशखाली में महिलाओं से रेप और जमीन कब्जाने के मामले में जांच के लिए पहुंच चुकी है। वहां उसने कई लोगों के बयान दर्ज किए थे। बता दें, एक दिन पहले ही CBI ने 5 आरोपियों के खिलाफ पहली प्राथमिकी दर्ज की है।

CBI ने क्यों मारा था छापा?

CBI ने यह छापा 5 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर हुए हमले के मामले में मारा था। उस समय ED की टीम TMC नेता शाहजहां शेख के आवास पर राशन घोटाले से संबंधित मामले में जांच करने पहुंची थी। तभी स्थानीय लोगों ने ED पर हमला कर दिया, जिसमें कई अधिकारी घायल हुए थे। मामले में पुलिस ने शेख समेत कई के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसकी जांच कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को दी है।

क्या है पूरा मामला?

ईडी टीम पर 5 जनवरी को संदेशखाली में उस वक्त हमला हुआ था जब वह कथित राशन घोटाले के सिलसिले में शेख शाहजहां के परिसर में छापेमारी करने गई थी। सीबीआई को अपनी जांच के दौरान संदेशखाली में हथियारों का जखीरा छिपे होने का इनपुट मिला था। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई की एक टीम ने शुक्रवार की सुबह छापेमारी शुरू की। इस दौरान विदेशी पिस्तौल सहित हथियार जब्त किए गए।
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले का मुख्य आरोपित निलंबित तृणमूल नेता शेख शाहजहां हिरासत में हैं। बता दें कि शेख शाहजहां की बंगाल पुलिस ने हमले के सिलसिले में 29 फरवरी को गिरफ्तार किया था।

संदेखशाली कब सुर्खियों में आया?

ईडी की टीम पर हमला होने के बाद संदेशखाली उस समय सुर्खियों में आया, जब वहां की महिलाओं ने शाहजहां शेख पर जमीन हड़पने और उसके गुर्गों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. इस मामले को लेकर लेफ्ट और बीजेपी पार्टियों ने ममता सरकार के खिलाफ जमकर विरोध किया. संदेशखाली में धारा 144 लगाकर विपक्ष के नेताओं को वहां जाने से रोका गया, हालांकि बीजेपी के नेताओं ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक इस मामले को उठाया और ममता सरकार पर दबाव बनाया कि संदेशखाली के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो. हालांकि बंगाल पुलिस ने इसके गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन शाहजहां शेख पर हाथ डालने से पुलिस डर रही थी. कोलकाता हाई कोर्ट ने जब शाहजहां की गिरफ्तारी का आदेश दिया तो पुलिस ने एक्शन लेते हुए फरवरी के अंत में अरेस्ट किया था.

पीड़ितों ने की थी राष्ट्रपति से मुलाकात

इसके बाद संदेशखाली की 5 महिलाओं समेत हिंसा के शिकार 11 पीड़ितों ने कुछ समय पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी. इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. इस दौरान सेंटर फॉर एससी/एसटी सपोर्ट एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. पार्थ बिस्वास ने कहा कि संदेशखाली बांग्लादेश बॉर्डर के साथ लगा हुआ है, 10 साल में इसी रास्ते से बड़ी घुसपैठ हुई है. संदेशखाली की डेमोग्राफी तेज़ी से बदल रही है. उन्होंने कहा कि ED पर हुए अटैक के पीछे बाहरी ताकत शामिल थी. उन्होंने टीएमसी का नाम लिए बिना कहा कि शेख शाहजहां के पीछे एक बड़ी पार्टी है. शाहजहां शेख ने दलितों को उनकी ज़मीन से हटाया गया है, आदिवासी ज़मीन की लीज वापस लेने पर मारपीट भी हुई.

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