The petition filed in the Supreme Court in support of the nameplate pleaded, ‘It should not be forcibly given a communal colour’
नई दिल्ली। Nameplate case in SC यूपी में कांवड यात्रा के दौरान दुकानदारों को नेमप्लेट लगाने के योगी सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस बीच अब एक बार फिर ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। हालांकि, अब कोर्ट में इसके समर्थन में याचिका डाली गई है।
बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के साथ उत्तराखंड और मध्यप्रदेश सरकार को भी ऐसे ही आदेश पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सभी आदेशों पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी।
याचिका में क्या कहा गया?
दरअसल, मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी निर्देश का समर्थन करते हुए एक याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मामले को जबरन साम्प्रदायिक रंग देने की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुझे इस मामले में पक्षकार भी बनाया जाए।
याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव (Nameplate case in SC) ने कहा कि ये आदेश शिवभक्तों की सहूलियत, आस्था और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिया गया था। उन्होंने कहा कि इसे बेवजह साम्प्रदायिक रंग दिया गया है।
बता दें कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कांवड यात्रा के दौरान दुकान मालिकों को दुकानों के बाहर अपने नाम प्रदर्शित करने के लिए कहा था।
यूपी सरकार ने दिया था ये आदेश
उल्लेखनीय है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीन राज्य सरकारों के अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों पर अंतरिम रोक लगा दी थी कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों को ऐसी दुकानों के बाहर मालिकों के नाम प्रदर्शित करने चाहिए।
कथित तौर पर यह निर्देश उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में लागू किया गया था और मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।
दुकानदारों ने नहीं दाखिल की याचिका
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मसले पर कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले दुकानदार नहीं हैं, बल्कि वो लोग हैं, जो इसे सियासी रंग देना चाहते हैं. याचिकाकर्ता ने शिवभक्तों के मूल अधिकारों का हवाला देकर खुद को इस मसले में पक्षकार बनाये जाने और उसका पक्ष सुने जाने की मांग की है.
SC ने आदेश में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कहा है कि उपरोक्त निर्देशों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश पारित करना उचित है. ढाबा मालिकों, फल विक्रेताओं, फेरीवालों समेत खाद्य विक्रेताओं को भोजन या सामग्री का प्रकार प्रदर्शित करने की जरूरत हो सकती है, लेकिन उन्हें मालिकों की पहचान उजागर करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यूपी, उत्तराखंड की सरकार को नोटिस भी जारी किया है. कोर्ट का कहना था कि यदि याचिकाकर्ता अन्य राज्यों को जोड़ते हैं तो उन राज्यों को भी नोटिस जारी किया जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पिछले हफ्ते मुजफ्फरनगर पुलिस ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों को अपने मालिकों की नेमप्लेट लगाने के निर्देश दिए थे. बाद में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में इस आदेश को लागू कर दिया. उत्तराखंड सरकार ने भी इस संबंध में आदेश जारी किया था. योगी सरकार के इस कदम की ना सिर्फ विपक्ष, बल्कि एनडीए के सहयोगी जेडी(यू) और आरएलडी समेत अन्य पार्टियों ने भी आलोचना की थी.
विपक्ष ने आरोप लगाया था कि ये आदेश सांप्रदायिक और विभाजनकारी है और इसका उद्देश्य मुसलमानों और अनुसूचित जातियों (एससी) को उनकी पहचान बताने के लिए मजबूर करके उन्हें निशाना बनाना है. हालांकि, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड की सत्ता में मौजूद बीजेपी ने कहा था कि यह कदम कानून-व्यवस्था के मुद्दों और तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.



