पुसौर
षिक्षा, संस्कृति और कला नगरी पुसौर में यू ंतो आये दिन ऐसे आयोजन होता रहा है जिसमें कि पुसौर को विषेश पहचान बनी हुई है और इसी कारण क्षेत्र में ही नहीं बल्कि प्रदेष स्तर में इसका नाम सुचिबद्ध है इसमें अब एक क्षेपक के रूप् में सावन महिने में हो रहे रूद्राभिशेक का है जो पिछले सात सालों लगातार बडे तालाब स्थित महादेव मंदिर में जारी है जिसमें श्रद्वालुजन इसका लाभ निषुल्क उठाते रहे हैं जबकि निजी तौर पर रूद्राभिशेक का आयोजन करने से यजमान को हजारों रूपये का खर्च वहन करना पडता है। इसकी षुरूआत कोरोना काल से पहले हुई और कोरोनाकाल में भी श्रद्धालुजन सोषल डिस्टेंस का पालन करते हुये इसे संपन्न किया और लगातार यह आयोजन अब 7 वर्श पुर्ण कर चुका है। जानकारी अनुसार स्थानीय पंडितों द्वारा श्रद्धालुओं को धर्म परायण बनाये रखने के इरादे से बगैर दक्षिणा खर्च लिये इसे प्रारंभ किया गया जिसमें आसपास ग्राम के श्रद्धालुजन भी भाग लेते रहे है। श्रद्धालुओ की संख्या को देखते हुये पुजा पाठ आरती आदि को सुगम बनाने के लिये श्रद्धालुओं का कई समुह बनते हैं जहां प्रत्येक समुह के लिये एक बडी परात में भगवान षिव जी के विग्रह स्थापित होते है वहीं मंत्रोच्चार अनुसार श्रद्धालु बेलपत्ता, फुल उरवा, चावल धुप दीप आदि अर्पित करते हैं जो पंडितों के मंत्रोच्चार व स्तुति पाठ आदि के जरिये होता हैं। क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर एक चर्चा बना हुआ है जिसमें स्थानीय पंडितों एवं श्रद्धालुओं के अनुषासन की सराहना की जा रही है चूंकि यह आयोजन सुबह ठीक 6 से 8 बजे के बीच ही सम्पन्न होता है और इसके लिये सभी सहभागी श्रावण माह भर ब्रम्हमुहुर्त से उठकर तैयार हो जाते हैं। उल्लेखनीय है कालसर्पदोश जिनके जन्मकुडली में होता है उनके लिये भी इस बीच एक आयोजन की गई थी जिसमें क्षेत्र के लोग इसमें षामिल होकर इस दोश का निवारण किये जाने की जानकारी प्रकाष में आया है।


