Students closely observed the working of the printing press; a step towards understanding the possibilities of innovation and startup
नवाचार और स्टार्टअप की संभावनाओं को जानने-समझने तथा प्रिंटिंग एवं प्रकाशन उद्योग की व्यावहारिक प्रक्रिया को देखने के उद्देश्य से शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर के विद्यार्थियों ने गुरुवार को एक प्रमुख प्रिंटिंग प्रेस का शैक्षणिक दौरा (एक्सपोजर विजिट) किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने पत्रकारिता एवं प्रकाशन से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं को न केवल समझा, बल्कि आधुनिक प्रिंटिंग तकनीकों को लाइव देखने का भी अवसर मिला।
प्रिंटिंग प्रक्रिया की बारीकियों को समझा
विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने रिपोर्टिंग, राइटिंग, एडिटिंग, एवं प्रकाशन प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ प्राप्त की। प्रिंटिंग प्रक्रिया के विभिन्न चरणों – बटर पेपर निर्माण, पेस्टिंग, प्लेट मेकिंग, क्लीनिंग, प्रिंटिंग, कटिंग, ब्लेंडिंग आदि को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि अखबारों व अन्य मुद्रण सामग्री में प्रयुक्त सायन, मैजेंटा, येलो एवं ब्लैक (CMYK) रंगों के संयोजन से किस प्रकार उच्च गुणवत्ता वाली छपाई सुनिश्चित की जाती है।
संस्थान इनोवेशन काउंसिल के तहत आयोजन
इस शैक्षणिक दौरे का आयोजन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) इकाई के तहत किया गया, जिसमें मनोविज्ञान, लाइब्रेरी साइंस एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में लगभग 60 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और प्रिंटिंग उद्योग में रोजगार व स्टार्टअप की संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
शिक्षकों व विद्यार्थियों की उत्साहजनक सहभागिता
इस विजिट के दौरान विभिन्न विभागों के विद्यार्थी डॉ. संजय डोंगरे, डॉ. प्रज्ञा गुप्ता, सत्यवान साहू, नीलिमा किरण, इंदू बेक, निशा भोई, रंजीता पटेल, निरंजन कुमार के नेतृत्व में शामिल हुए। विद्यार्थियों ने इस दौरे को बेहद सूचनात्मक और व्यावहारिक अनुभव से भरपूर बताया और कहा कि इससे उनकी पत्रकारिता, मुद्रण और प्रकाशन उद्योग से जुड़ी बारीकियों को समझने में सहायता मिली।
व्यावसायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण अनुभव
शैक्षणिक भ्रमण के अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस विजिट ने न केवल उनकी तकनीकी समझ को विकसित किया, बल्कि उन्हें भविष्य में इस क्षेत्र में संभावित करियर और स्टार्टअप के अवसरों को लेकर प्रेरित भी किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण व शैक्षणिक दौरों को भविष्य में और अधिक प्रोत्साहित करने की बात कही।




