रायगढ़। एक ओर जहाँ रायगढ़ राज्य का औद्योगिक केंद्र बनकर उद्योगपतियों की तिजोरियाँ भर रहा है, वहीं दूसरी ओर यहाँ के निवासी सांस लेने तक के लिए जूझ रहे हैं। ताज़ा मामला तमनार ब्लॉक के बरपाली ग्राम में प्रस्तावित “केलो स्टील एंड पावर” संयंत्र का है, जिसके लिए आगामी दिनों में पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु लोक-सुनवाई प्रस्तावित है।
धड़ाधड़ मंजूरी, आँखें बंद प्रशासन
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पर्यावरण विभाग लगातार औद्योगिक परियोजनाओं को बगैर गहन अध्ययन के मंजूरी दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस संयंत्र से हजारों ग्रामीण सीधे प्रभावित होंगे, जबकि पूरा रायगढ़ ज़िला पहले से ही गंभीर प्रदूषण का शिकार है।
बीमारियों और विरोध की लंबी फ़ेहरिस्त
बरपाली और आसपास के गाँवों में पहले से ही श्वसन, त्वचा और अन्य गंभीर बीमारियाँ आम हो चुकी हैं। ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर गहरा रोष है। वे मांग कर रहे हैं कि जब तक प्रदूषण नियंत्रण पर ठोस नतीजे सामने न आएँ, तब तक नए भारी उद्योगों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
70% इकाइयाँ बंद होंगी, अगर ईमानदारी से जांच हो
पर्यावरणविदों का दावा है कि यदि शासन निष्पक्ष रूप से मौजूदा इकाइयों का निरीक्षण कराए, तो 70% फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ेगा, क्योंकि वे प्रदूषण मानकों का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं। इसके लिए कारखाना संचालकों पर सख्त कार्रवाई भी संभव है।
ग्रामीणों की माँगें
नए भारी उद्योगों पर अस्थायी प्रतिबंध, सभी मौजूदा इकाइयों का स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट, ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, गंभीर बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्य शिविर और विशेष अस्पताल की व्यवस्था।
आगे क्या?
लोक-सुनवाई के दिन सामाजिक संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा की है। यदि संयंत्र को अनुमति मिलती है, तो रायगढ़ की पहले से जहरीली हो चुकी हवा और भी खतरनाक हो सकती है।
तथ्य पर एक नज़र:
- रायगढ़, छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक प्रदूषित जिला
- प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता: 1 MTPA
- संयंत्र में स्पंज आयरन, पावर प्लांट व रोलिंग मिल शामिल
- रोज़गार और राजस्व अहम, लेकिन स्वच्छ हवा जीवन का अधिकार
अब निर्णय प्रशासन के हाथ में है—क्या वह उद्योगपतियों से आगे सोच पाएगा, या फिर रायगढ़वासियों को और जहरीली हवा में जीने को मजबूर किया जाएगा?



