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इंद्रावती टाइगर रिजर्व में गिद्ध संरक्षण को नई उड़ान, सैटेलाइट टैगिंग और सफल रिहाई

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बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – छत्तीसगढ़ वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के संयुक्त प्रयास से गिद्ध संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में भारतीय गिद्ध (Gyps indicus) और सफेद पीठ वाले गिद्ध (Gyps bengalensis) की सफलतापूर्वक सैटेलाइट टैगिंग और रिंगिंग की गई, जिसके बाद उन्हें जंगल में वापस रिहा कर दिया गया। यह पहल देश में संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

 

यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुधीर कुमार अग्रवाल (IFS) के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। संचालन की जिम्मेदारी इंद्रावती टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक व जगदलपुर सर्कल के सीसीएफ (वन्यजीव) आरसी दुग्गा, उप निदेशक संदीप बलगा तथा बीजापुर के डीएफओ रंगनाथ रामकृष्ण वाई ने निभाई।

 

2 मई 2025 को हुए इस ऑपरेशन के तहत 2 गिद्धों को सैटेलाइट टैग और 4 अन्य को पहचान के लिए रिंग पहनाई गई। इस प्रक्रिया को सूरज नायर (फील्ड बायोलॉजिस्ट, इंद्रावती टाइगर रिजर्व) और देश के अग्रणी गिद्ध विशेषज्ञ सचिन रानाडे (BNHS) की देखरेख में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) की अनुमति और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत अंजाम दिया गया।

 

सैटेलाइट टैगिंग का उद्देश्य गिद्धों की आवाजाही, प्रवास, बसेरा, घोंसले के व्यवहार और मृत्यु के संभावित कारणों को समझना है। यह डेटा संरक्षण नीतियों के निर्माण में सहायक होगा और इंद्रावती टाइगर रिजर्व सहित पूरे राज्य में गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्जीवित करने में मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

 

आगे की रणनीति टेग किए गए गिद्धों की नियमित निगरानी, महत्वपूर्ण बसेरा और घोंसले वाले क्षेत्रों की पहचान, मृत्यु दर और जोखिम कारकों का विश्लेषण, मौसमी और प्रवासी व्यवहार की समझ

 

आधारित सरक्षण नीतियों का विकास

 

यह पहल छत्तीसगढ़ को गिद्ध संरक्षण में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है और पारिस्थितिक अनुसंधान व नीति निर्माण में समन्वित प्रयासों का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह भारत की जैव विविधता को संरक्षित रखने की दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी कदम है।

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