कांकेर। कांकेर जिले के रोफरा ग्राम खमढोड़गी फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (एफईएस) के अंतर्गत कार्यरत 21 सदस्यीय दल ने विभिन्न राज्यों से आकर सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) प्रक्रिया का अध्ययन किया। इस भ्रमण में ओडिशा, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विज़िट का उद्देश्य सामुदायिक वन अधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया, इस दौरान आने वाली चुनौतियाँ एवं प्राप्ति के बाद किए जाने वाले कार्यों के अनुभवों को साझा करना था। ग्रामवासियों ने बताया कि सीएफआर प्राप्त करने में उन्हें कई वर्षों तक जागरूकता कार्यक्रम चलाने पड़े। इस दौरान सीएफआरएमसी (सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति) ने ग्रामवासियों को संगठित कर प्रक्रिया को सफल बनाया। सीएफआरएमसी अध्यक्ष छबिलाल कुंजाम, सचिव अकतू कावड़े एवं पंच अमृत नाग ने विस्तार से बताया कि फंड का उपयोग ग्रामीण विकास, शिक्षा ,वन संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन के लिए किया जा रहा है। ग्राम सभा की कार्य योजना जिला प्रशासन को भेजी जाती है, जिसमें जंगल संरक्षण, सामुदायिक विकास एवं विपणन के प्रस्ताव शामिल होते हैं। विज़िट के दौरान जंगल भ्रमण में अर्जुन झाल के पेड़ की औषधीय महत्ता पर भी चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि इसके बीज का सतत उपयोग कर ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाया जा सकता है। ग्राम भ्रमण के दौरान सीएफआरएमसी सदस्यों ने प्रतिनिधियों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर पूर्व सरपंच श्री प्यार सिंह मंडावी, पूर्व पंच श्री रूपराय कोमरा एवं पंच श्री रामजी नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए। सीख एवं निष्कर्ष इस विज़िट ने सीएफआर प्रक्रिया के तहत सामुदायिक संगठनों की भूमिका एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के नए आयामों पर प्रकाश डाला। अर्जुन झाल जैसे पेड़ों के औषधीय गुणों के सतत उपयोग से ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल सकती है।….



