मानसून को देखते सुरक्षा में चूक, जिम्मेदारों पर सवाल, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2025 के अंतर्गत जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बीजापुर द्वारा इस वर्ष 1,21,600 मानक बोरे संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 9 मई से शुरू हुए संग्रहन कार्य में 21 मई तक 12,226.638 मानक बोरे संग्रहित किए जा चुके थे।
समिति देपला के अंतर्गत फड़ कोत्तागुड़ा, गोरगुंडा-अ+ब, पोषडपल्ली, कारकावाया एवं चेरपल्ली फड़ क्षेत्रों में श्रमिकों द्वारा परंपरागत चुटका पद्धति से तेंदूपत्ता को नदी किनारे सुखाया जा रहा था। लेकिन 22 मई की रात तेज मूसलाधार बारिश और 23 मई को नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के कारण कुल 4,60,840 में से 3,23,539 गड्डियाँ बह गईं, जिससे लगभग 17,79,465 रुपये का नुकसान हुआ।
वन विभाग ने इसे प्राकृतिक आपदा मानते हुए प्रभावित श्रमिकों को बीमा योजना के तहत मुआवजा देने का निर्णय लिया है। बीमा कंपनी को भुगतान हेतु निर्देश जारी किए जा चुके हैं। यूनियन प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि श्रमिकों को उनका मेहनताना 100 प्रतिशत उनके बैंक खातों में ऑनलाइन माध्यम से प्रदान किया जाएगा।
हालांकि, इस घटना ने विभागीय लापरवाही को उजागर कर दिया है। मानसून पूर्वानुमान के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। रेंजर की निष्क्रियता वी भूमिका पर खड़े हो रहे सवाल विवादों में रहते हैं हमेशा विवादों से हमेशा करते हैं वरिष्ठ अधिकारी दूरी अन्य जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौन हैं। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते पत्ता भंडारण की बेहतर व्यवस्था होती, तो यह नुकसान टाला जा सकता था।
गौरतलब है कि नुकसान के आंकलन और आंकड़ों को सार्वजनिक करने में विभाग को दो दिन का समय लग गया। बस्तर दौरे के दौरान तेंदूपत्ता तोड़ाई में हो रही देरी को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और बस्तर क्षेत्र के वन मंत्री केदार कश्यप ने भी असंतोष जताया पहले ही नाराज दिखे थे। अब तक पूरे जिले में तेंदूपत्ता संग्रहन कार्य सुचारु रूप से शुरू नहीं हो पाया है।
बारिश से हुए नुकसान को लेकर सामान्य वन मंडल अधिकारी रंगाराथा रामाकृष्णा वाय ने आधिकारिक बयान जारी किया है। अब देखना यह होगा कि आगे क्या कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।



