,मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मितानिनों ने किया अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान, चुनावी वादे पूरे न होने पर जताई नाराजगी
मुंगेली/लोरमी /- स्वास्थ्य मितानिन संघ एवं प्रशिक्षक कल्याण संघ ने छत्तीसगढ़ शासन पर चुनावी वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन कामबंद-कलमबंद हड़ताल और धरना प्रदर्शन का ऐलान किया है।
लोरमी ब्लॉक के सुपरवाइजर हेमिन मंगेशकर ने बताया कि संघ का कहना है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावी घोषणा पत्र में यह वादा किया गया था कि मितानिन कार्यक्रम में कार्यरत मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम.) अंतर्गत संविलियन किया जाएगा। लेकिन इसके विपरीत कार्यक्रम का संचालन दिल्ली की एन.जी.सी. संस्था को सौंप दिया गया है। इससे सभी मितानिन व प्रशिक्षक बेहद निराश हैं।
संघ ने बताया कि पूर्व में भी 13 दिसंबर 2024 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की गई थी, उस समय संचालक एन.एच.एम. ने आश्वासन दिया था कि शासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। किंतु अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। साथ ही पिछले 13 महीनों से वेतन/क्षतिपूर्ति भुगतान 3-4 माह के अंतराल पर मिल रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।
इस पर संघ ने पुनः 29 जुलाई 2025 को राज्य स्तरीय सांकेतिक धरना दिया और अब 7 अगस्त 2025 से ग्राम तूता, नवा रायपुर में अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरना करने का निर्णय लिया है।
संघ ने शासन से मांग की है कि मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर एवं हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर को तत्काल एन.एच.एम. अंतर्गत संविलियन कर उनके वेतन भुगतान की नियमित व्यवस्था की जाए।
छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं लोरमी विधायक अरुण साव को स्वास्थ्य मितानिनों ने ज्ञापन सौंपकर विधानसभा चुनाव 2023 के घोषणा पत्र में किए गए वादे को पूरा करने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि मोदी जी की गारंटी के तहत घोषणा पत्र में मितानिन कार्यक्रम से जुड़े मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक एवं हेल्प डेस्क पॉसिलिटेटर के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ है।
मितानिनों ने ज्ञापन में कहा कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभा रही हैं, बावजूद इसके उन्हें उचित मानदेय एवं सुविधाएं प्राप्त नहीं हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि घोषणा पत्र के अनुरूप मितानिनों को मानदेय वृद्धि, स्थायी सुरक्षा एवं सामाजिक सुविधा का लाभ तत्काल दिया जाए।
इस अवसर पर मितानिन सुपरवाइजर हेमिन मंगेश्कर,चंद्रप्रभा राजपूत व बड़ी संख्या में मितानिनें उपस्थित थीं और उन्होंने उपमुख्यमंत्री अरुण साव से आग्रह किया कि विधानसभा चुनाव में किए गए वादों को शीघ्र लागू किया जाए।
👉 हालाँकि, विपक्षी दल के नेत लोरमी जनपद पंचायत के सभापति विद्यानंद चंद्राकर ने इस आयोजन पर जमकर निशाना साधा। विपक्षी नेताओं ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “बीजेपी सरकार के उपमुख्यमंत्री जनता की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए तीजा मिलन समारोह करवा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली-पानी की समस्याएँ जस की तस हैं, और महतारी वंदना योजना के नाम पर गैस-तेल समेत ज़रूरी वस्तुओं के दाम बढ़ाकर महिलाओं को सिर्फ़ ‘लॉलीपॉप’ पकड़ाने का काम किया जा रहा है।”
स्थानीय नागरिकों ने भी कहा कि “त्योहार पर साड़ी, झोला, टेटरी-खुरमी तो मिली, पर रोज़गार, महँगाई और सुविधाओं की समस्या का हल अब तक नहीं हुआ।”
1. जनता की प्रतिक्रिया – जैसे “कुछ महिलाओं ने कहा कि त्योहार पर तोहफ़ा अच्छा है, पर असली समस्या बिजली, पानी और महंगाई की है।”
2. विपक्ष की टिप्पणी – “विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार केवल साड़ी-झोला बांटकर जनता को गुमराह कर रही है।”
3. तुलना/व्यंग्य – “साड़ी,-झोला, टेटरी -खुरमी से पेट भरेगा या बच्चों की पढ़ाई होगी?” जैसी लाइनें।
4. लोकल टोन – छत्तीसगढ़ी शैली में हल्का व्यंग्य, जैसे “गाँव के लोग कहिन – मोर घर मं बिजली नइ आवत, अउ झूला-खुरमी ले सरकार संतोष करावत हे।”



