Ban imposed on the entry of pastors and converted people in the village. Villagers put up a board outside the village in protest against conversion.
कांकेर । कांकेर जिले के कोयलीबेदा विकासखंड के गांवों में मतांतरण के खिलाफ ग्रामीण एकजुट हो रहे है लगातार हो रहे धर्मातरण से गावों में तनाव की स्थिति बन रही है जिससे सामुदायिक सदभाव खराब हो रही है इस स्तिथि को नियंत्रित करने रविवार को सुलंगी गाँव में बैठक रखा गया जिसमें कांकेर जिले के कुल 20 गांव जे समाज प्रमुखों द्वारा बैठक रखी गई थी जुसमे निर्णय लिया गया कि गांव के प्रवेश द्वार पर पास्टर व ईसाई धर्म के लोगों का प्रवेश वर्जित करने का बोर्ड लगाया गया कोयलीबेदा तहसील अंतर्गत ग्राम सुलंगी गांव में पास्टर व पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध का बोर्ड लगाया गया है ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार,सुलंगी गांव में 16 परिवार के लोग दूसरे धर्म को मानने लग गए हैं जिसमें दो प रिवार को वापस मिलाया गया है 16 परिवार अभी भी दूसरे धर्म का अनुसरण कर रहे हैं। जिसके चलते गांव और आदिवासी समाज के रीति रीवाजों पर फर्क पड़ रहा है। साथ ही गांव का माहौल भी खराब हो रहा था ग्रामीणों ने बताया कि ईसाई धर्म का हम विरोध नहीं कर रहे हैं। मगर जिस तरह से गांव के भोले-भाले लोगों का मतांतरण कराया जा रहा है, उसका विरोध कर रहे हैं। बोर्ड में ग्रामीणों ने लिखा है कि पेशा अधिनियम 1996 लागु है जिसके नियम चार घ के तहत सांस्कृतिक पहचान व रुढीवादी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आदिवासियों को प्रलोभन देक र उनका मतांतरण कराना हमारे संस्कृति को नुकसान पहुंचाने के साथ आदिम संस्कृति को खतरा है। ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर ग्राम सुलंगी गाँव में ईसाई धर्म के पास्टर पादरी एवं बाह र गांव से आने वाले मत्तांतरण व्यक्तियों का धर्मिक व धर्मांतरण आयोजन के उद्देश्य से प्रवेश पर रोक लगाते हैं। इसके लिए गांव के प्रवेश द्वार पर बड़ा सा बोर्ड लगाया गया है। कुडाल गांव से हुई शुरुआत बता दें कि भानुप्रतापपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम कुडाल में ग्रामीणों ने इसकी शुरुआत की थी। ग्रामीणों ने गांव के चारों ओ र एक एक बोर्ड लगाया गया है जिसमें पास्टर और पादरी को गांव में घुसने को पूर्णतः प्रतिबंध किया गया है। कांकेर जिला में पहला गांव कुडाल है जहां लगभग 9 मतांतरित परिवार है। 10 दिन पहले मतांतरित परिवार के एक महिला की मृत्यु होने के बाद कफन दफन को लेकर गांव में बवाल हुआ था जिसके बाद ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर पास्टर पादरी को गांव में आने से सख्त मना किया गया था सविधान की पांचवी अनुसूचि में क्षेत्र में ग्राम सभा की मान्यता होता है जो अपने संस्कृति और परंपराओं के सुरक्षा करने के लिए निर्णय लेने में सक्षम है।


