मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मुंगेली– जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लालपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हरनाचाका–देवरहट प्रकरण अब तीसरे प्रहार के रूप में उभर रहा है, जहां छेड़छाड़ के संदेह में पकड़े गए युवकों के साथ पुलिस अभिरक्षा में मारपीट, सार्वजनिक अपमान और कथित गैरकानूनी जुलूस निकालने के आरोपों ने मुंगेली पुलिस विभाग की छवि को गहरी ठेस पहुंचाई है। वायरल वीडियो और लिखित शिकायत के बाद भी ठोस कार्रवाई न होना अब प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम देवरहट निवासी हेमून पटेल उर्फ राजेश पटेल पिता चमरू पटेल एवं गांव के लगभग 2 से 3 सौ ग्रामीण ने पुलिस अधीक्षक मुंगेली को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि दिनांक 06 दिसंबर 2025 को दोपहर लगभग 1 से 1:30 बजे के बीच हरनाचाका महाराणा प्रताप चौक के पास सूरज पटेल एवं सम्मत पटेल पर छेड़छाड़ का आरोप लगाकर भीड़ और पुलिस की मौजूदगी में बेरहमी से मारपीट की गई। आरोप है कि पुलिस कर्मी न केवल मूकदर्शक बने रहे, बल्कि भीड़ की हिंसा को रोकने के बजाय हालात को और बिगड़ने दिया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि दोनों युवकों को अपराध सिद्ध हुए बिना “हिस्ट्रीशीटर” की तरह गांव और देवरहट बाजार में जुलूस के रूप में घुमाया गया। इस दौरान उनसे जबरन नारे लगवाए गए, अपमानजनक शब्द कहलवाए गए और सार्वजनिक रूप से उनकी छवि धूमिल की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम कानून, संविधान और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। इस कथित पुलिसिया अत्याचार के वीडियो साक्ष्य भी सामने आने की बात कही गई है, जिन्हें पेन ड्राइव के माध्यम से सौंपा गया है।
मामले में लालपुर थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अमित गुप्ता पर सीधे-सीधे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि थाना प्रभारी द्वारा युवकों के साथ गाली-गलौच करते हुए “लड़की छेड़ोगे” जैसे शब्द कहकर लात-घूंसे मारे गए। यदि वीडियो साक्ष्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि पुलिस की भूमिका को न्याय के बजाय दमन के रूप में उजागर करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधियों को सजा देने का अधिकार केवल न्यायालय को है, न कि पुलिस या भीड़ को। पुलिस अभिरक्षा में मारपीट और जुलूस निकालना सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के भी खिलाफ है। इसके बावजूद अब तक किसी पुलिसकर्मी पर निलंबन या सख्त कार्रवाई नहीं होना, पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह भी कहा जा रहा है कि यदि पुलिस खुद अपने ही कर्मियों पर कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो जनता का भरोसा कानून-व्यवस्था से पूरी तरह उठ जाएगा।
हालांकि, एडिशनल एसपी मुंगेली नवनीत कौर छाबड़ा द्वारा थाना प्रभारी अमित गुप्ता के विरुद्ध जांच कर दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन केवल कागजी रहेगा या वास्तव में दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
अब पूरा जिला यह देख रहा है कि वायरल वीडियो, शिकायत और जनआक्रोश के बावजूद मुंगेली पुलिस विभाग आत्ममंथन कर कानून के अनुसार कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। पीड़ितों को न्याय मिलेगा या पुलिसिया संरक्षण के आरोप और गहरे होंगे—इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।



