The district cooperative bank building has been incomplete for three years, dashing the hopes of farmers in the Amora region.
कांकेर विकासखंड नरहरपुर के अंतर्गत ग्राम अमोड़ा में बनने वाला जिला सहकारी बैंक भवन पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। किसानों की सुविधा और आर्थिक लेनदेन को सरल बनाने के उद्देश्य से स्वीकृत यह बैंक भवन अब राजनीतिक बदलाव और सरकारी उदासीनता का शिकार हो चुका है।
अमोड़ा क्षेत्र के लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बादल प्रवास के दौरान ठोस मांग रखते हुए कहा था कि नरहरपुर क्षेत्र में केवल एक ही जिला सहकारी बैंक होने से किसानों को भारी परेशानी होती है। लंबी दूरी तय कर बैंक पहुंचना, लेनदेन में देरी, और कृषि कार्यों में बाधा जैसी स्थितियों से किसान जूझ रहे थे। किसानों की उसी आवश्यकता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अमोड़ा में जिला सहकारी बैंक स्वीकृत कर दिया और भवन निर्माण भी शुरू कर दिया गया था।
शुरुआत में कार्य तेजी से आगे बढ़ा, लेकिन चुनावी माहौल के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया। उम्मीद थी कि चुनाव बाद कार्य पुनः शुरू होगा और क्षेत्र के किसानों को राहत मिलेगी, मगर भाजपा सरकार आने के बाद से यह काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी भवन अधूरा पड़ा है और बैंक का संचालन तक शुरू नहीं हो पाया है।
किसानों का कहना है कि बैंक बंद होने के कारण उन्हें आज भी नरहरपुर या अन्य दूरस्थ शाखाओं का सहारा लेना पड़ता है। इससे समय, पैसा और मेहनत सभी बर्बाद होते हैं। जिन किसानों को ऋण, बीज, खाद या फसल उपज से जुड़े कार्यों के लिए तत्काल बैंक सुविधा चाहिए होती है, उन्हें सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द अधूरे भवन का निर्माण पूरा कर बैंक संचालन शुरू कराया जाए, ताकि क्षेत्र के हजारों किसान सीधे तौर पर लाभ उठा सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जिस भरोसे और उम्मीद के साथ अमोड़ा क्षेत्र के लिए जिला सहकारी बैंक स्वीकृत किया गया था, वह आज भी अधर में लटका हुआ है। अब देखना यह है कि सरकार कब इस अधूरे पड़े भवन को फिर से संजीवनी देती है और किसानों की लंबे समय से लंबित मांग पूरी करती है।



