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किरारी में 18 दिसंबर को गुरु घासीदास जयंती पर राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन का भव्य हुआ आयोजन

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A grand state-level poetry symposium was organized in Kirari on December 18th to celebrate Guru Ghasi Das Jayanti.

प्रमोद अवस्थी मस्तूरी

Ro.No - 13672/156

मस्तूरी।महान समाज सुधारक, सतनाम पंथ के प्रवर्तक सद्गुरु घासीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर 18 दिसंबर को मस्तूरी के ग्राम किरारी में राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से पधारे कवियों ने अपने ओज, श्रृंगार, हास्य और गीतात्मक काव्य-पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कवि सम्मेलन में मीर अली मीर (रायपुर) गीत, कृष्णा भारती (नांदघाट) हास्य, सोमप्रभा नूर (कोटा) श्रृंगार, शरद यादव ‘अक्स’ (सीपत), रामरतन श्रीवास (जांजगीर), रशिका बानो (कोरबा) श्रृंगार रस, शशिभूषण स्नेही (बिलाईगढ़) हास्य रस, आदित्य बर्मन वीर रस तथा जगतारन डहरे ने ओजपूर्ण काव्य-पाठ प्रस्तुत किया। कवि मंच का सफल संचालन शशिभूषण स्नेही ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक प्रतिनिधि राजमहंत लखन टण्डन, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सतकली बावरे, जनपद पंचायत सदस्य देवेन्द्र कृष्णन, लेखक-पटकथा एवं संवाद लेखक दिलीप कौशिक, दूरदर्शन एंकर महेन्द्र साहू, डॉ. गोवर्धन मार्शल तथा वरिष्ठ साहित्यकार भरत मस्तूरिहा उपस्थित रहे।

इस अवसर पर दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया—
* ‘जीना है’ (लेखक: जगतारन डहरे)
* ‘मोर अँगना म’ (लेखक: ठा. व्यास सिंह ‘गुमशुम’)
कार्यक्रम में श्रोताओं के रूप में अशोक कुमार दिव्य, सानुज सोनी, दिलीप पाण्डेय, डॉ. दुर्गा प्रसाद मेरसा, हरीश पाण्डल, टेकचंद पाण्डल, महेतरु मधुकर, दिलीप भूषण कुर्रे, चिंतामणी देशलहरे, गजानंद पात्रे, गौरीशंकर सिन्हा, अनिल जाँगड़े, सुशील, राजकुमारी, गीता, रीना,कृष्णा मानसी मेरसा सहित बड़ी संख्या में साहित्य-प्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।

आयोजन का सफल दायित्व डहरे परिवार किरारी के साथ द्वारिका, विजय, बच्छराज भागवत, चन्द्रप्रकाश, लखन मनराखन, नरेन्द्र पाल, शैलेष पाल, दृग्गपाल, नागराज, कमल, सुनील ,ऊधो, राजाराम, राजगोपाल, धनंजय, आशुतोष, लोकेश, पप्पू, विक्की, गनेशू, रमेश, धनेश्वर, दया, अविनाश एवं पंकज ने निभाया।
कार्यक्रम के अंत में भरत मस्तूरिहा द्वारा संचालन सहयोग एवं आभार प्रदर्शन किया गया।

संपूर्ण आयोजन सद्गुरु घासीदास के मानवतावादी विचारों, सामाजिक समरसता एवं साहित्यिक चेतना को समर्पित रहा।

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