Home Blog अवैध अतिक्रमण पर चली बुलडोजर नेताओं के साथ लोगों की चुप्पी समर्थन,...

अवैध अतिक्रमण पर चली बुलडोजर नेताओं के साथ लोगों की चुप्पी समर्थन, प्रशासनिक दावे और स्थानीय विरोध सरकार पर उठे सवाल

0

Bulldozers demolish illegal encroachments; leaders and people remain silent in support, administrative claims and local protests raise questions about the government.

अल्टीमेटम बाद प्रशासन की सख्ती, राजनीतिक आरोप और जमीन लेन–देन व पर्यावरण क्षति के पहलू जांच के घेरे में

Ro.No - 13672/156

बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – नगर पालिका परिषद बीजापुर अंतर्गत नया बस स्टैंड के पीछे चट्टान पारा से लगे वन मद की भूमि पर की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जिला प्रशासन द्वारा इसे अवैध अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई बताया जा रहा है, वहीं प्रभावित पक्ष इसे जोर-जबरदस्ती और राजनीतिक प्रेरित बुलडोजर कार्रवाई करार दे रहा है। प्रशासन के अनुसार, उक्त क्षेत्र में पूर्व में भी तीन बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है। इस बार कार्रवाई से पहले नगर पालिका परिषद बीजापुर द्वारा अतिक्रमणकारियों को तीन बार नोटिस जारी कर स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर कलेक्टर बीजापुर के आदेशानुसार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बीजापुर के निर्देशन में राजस्व, पुलिस, वन विभाग एवं नगर पालिका की संयुक्त टीम ने सुबह 8 बजे से अभियान चलाया। खबर लिखे जाने तक लगभग 80 से अधिक अतिक्रमणकारियों को शासकीय भूमि से बेदखल किए जाने की बात प्रशासन ने कही है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में नगरवासियों द्वारा प्रशासनिक पहल का समर्थन भी किया गया।

हालांकि, दूसरी ओर प्रभावित लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक दबाव और राजनीतिक प्रभाव भी शामिल है। उनका आरोप है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था और मानवीय दृष्टिकोण के अचानक बुलडोजर चलाया गया। मामले की पड़ताल में यह तथ्य भी सामने आ रहे हैं कि जिन लोगों को पीड़ित बताया जा रहा है, उनके संबंध में क्षेत्र में अन्य गतिविधियों की जानकारी भी चर्चा में है। इनमें जमीन की खरीद–फरोख्त, एक से अधिक मकान होने की स्थिति, पहाड़ी क्षेत्र में खुदाई तथा पेड़ों की कटाई जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं। इन बिंदुओं से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता, जिससे मामला केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित न रहकर व्यापक जांच की आवश्यकता वाला बन गया है। फिलहाल, प्रशासनिक दावों और स्थानीय विरोधाभासी बयानों के बीच यह पूरा प्रकरण जांच का विषय बना हुआ है। बचे मकान टूटेंगे या बचेगे इस पर टूटे मकान के परिवारों को है इंतजार दूसरी और कह रहे हैं की जगह नहीं छोड़ा जाएगा अब देखना होगा की प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करेंगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here