मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मुंगेली /- लोरमी परिक्षेत्र में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी घर-घर गुरुचरण कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक के माध्यम से कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी तथा सभी संत समाज एवं पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए जाएंगे।
यह जानकारी देते हुए बताया गया कि त्यागी गुरु, तपस्वी गुरु, सतधारी गुरु एवं धर्म गुरु गुरु सोमेश बाबा जी के पावन मार्गदर्शन एवं सानिध्य में यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन भाग लेते हैं। यह कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार एवं सतनाम पंथ की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
घर-घर गुरुचरण कार्यक्रम को लेकर आयोजित इस आवश्यक बैठक में संत समाज, समाज प्रमुख, राज महंत, जिला महंत, ब्लॉक महंत, सेक्टर महंत, अठगवा महंत, छड़ीदार, भंडारी सहित विभिन्न अधिकारी एवं कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सरपंच एवं समाज के गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया गया है।
बैठक का आयोजन दिनांक 31 जनवरी 2026, दिन शनिवार को दोपहर 1:00 बजे, स्थान पंचायत भवन गोड खाम्ही (लोरमी परिक्षेत्र) में किया जाएगा। इस बैठक में सतनाम आध्यात्मिक शक्ति परिवार लोरमी एवं अखिल भारतीय सतनाम सेना के समस्त पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
आयोजकों ने बताया कि बैठक में घर-घर गुरुचरण कार्यक्रम की तिथि, रूट चार्ट, व्यवस्था समिति, प्रचार-प्रसार, सेवा दल, अनुशासन समिति सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी, ताकि कार्यक्रम को सुव्यवस्थित एवं सफल रूप से संपन्न कराया जा सके।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सतनाम आध्यात्मिक शक्ति परिवार लोरमी के समस्त महंत टीम एवं अखिल भारतीय सतनाम सेना के समस्त पदाधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी, जिससे कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके।
ब्लॉक महंत राधे सतनामी ने समस्त संत समाज एवं पदाधिकारियों से अपील की है कि वे समय पर बैठक में उपस्थित होकर अपने सुझाव एवं सहयोग प्रदान करें, ताकि घर-घर गुरुचरण कार्यक्रम को आध्यात्मिक शक्ति, अनुशासन और भव्यता के साथ आयोजित किया जा सके।
कुल मिलाकर यह बैठक लोरमी परिक्षेत्र में होने वाले घर-घर गुरुचरण कार्यक्रम की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे समाज में सतनाम पंथ की शिक्षाओं का विस्तार होगा और सामाजिक एकता एवं आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा मिलेगी।



