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संविधान के सर्वोच्च पद का अपमान: भाजपा अनुसूचित जनजातीय मोर्चा का उग्र प्रदर्शन, विरोध में ममता बनर्जी का पुतला फूंक किया नारेबाजी

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कांकेर। भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा, जिला कांकेर के नेतृत्व में सोमवार को दोपहर लगभग 3 बजे पश्चिम बंगाल में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के सम्मान से जुड़े घटनाक्रम के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुतला दहन कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

वक्ताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल में संथाल समाज से जुड़े एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंची थीं। संथाल समाज देश की प्रमुख आदिवासी जनजातियों में से एक है और ऐसे आयोजन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक माने जाते हैं। देश की प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति की उपस्थिति इस पूरे समाज के लिए गौरव का विषय थी, किंतु इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित सम्मान और संवैधानिक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के आगमन के बावजूद न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही पश्चिम बंगाल सरकार का कोई मंत्री कार्यक्रम में उपस्थित हुआ। सामान्यतः किसी भी राज्य में राष्ट्रपति के आगमन पर राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों द्वारा स्वागत किया जाता है, किंतु इस अवसर पर ऐसा नहीं किया गया। साथ ही कार्यक्रम स्थल को अंतिम समय में बदलने जैसी घटनाओं ने भी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम किया है।

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इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष ईश्वर कावड़े ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी एक साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर अपनी सादगी, संघर्ष और प्रतिभा के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंची हैं। वे देश की प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति हैं और पूरे आदिवासी समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का प्रतीक हैं। किंतु ऐसा प्रतीत होता है कि एक आदिवासी महिला का इस सर्वोच्च पद तक पहुंचना ममता बनर्जी और उनकी राजनीति को स्वीकार नहीं हो रहा है, यही कारण है कि उनके प्रति इस प्रकार की उपेक्षा और असम्मानजनक परिस्थितियां उत्पन्न की गईं।

उन्होंने कहा कि भारत संघ के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान वास्तव में भारत के संविधान का अपमान है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जिस सरकार के कार्यकाल में देश के राष्ट्रपति और संविधान की मर्यादा का इस प्रकार अनादर होता है, उस सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। आने वाले समय में देश की जनता संविधान की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी मानसिकता को लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देगी।

इस विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से देवेंद्र टेकाम, भानु नेताम, टेकेश्वर जैन,तारा ठाकुर, उत्तम जैन,दिनेश रजक,नितेश सलाम, मनोज ध्रुव, राजू नेताम, दिलीप जायसवाल, अशोक मतलाम, मिथलेश मंडावी, ईश्वर नाग, प्रवेश चौहान, पीयूष वलेचा, धनेंद्र ठाकुर, सुनील ठाकुर , जयंत अटभैया सहित बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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