समूह की प्रत्येक महिला 10-12 हजार रूपए प्रतिमाह आय अर्जित कर रहीं
उत्तर बस्तर कांकेर, 10 मार्च 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित ‘बिहान’ कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर सकारात्मक परिणाम दे रहा है। इससे महिलाएं न केवल स्वरोजगार से जुड़ रही हैं बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ बना रही हैं। जनपद पंचायत चारामा की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
ग्राम तेलगरा की नारी शक्ति स्व सहायता समूह की 10 महिलाओं ने आजीविका सृजन की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल की है। समूह की महिलाओं को प्रधानमंत्री खाद्य सूक्ष्म उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत 40-40 हजार रुपये की व्यावसायिक सहायता राशि प्रदान की गई। इस राशि से महिलाओं ने मसाला उत्पादन के लिए पिसाई एवं पैकेजिंग मशीन खरीदी और ‘नारी शक्ति मसाला प्रसंस्करण इकाई’ की स्थापना की। इस इकाई के माध्यम से अब समूह की महिलाएं मसालों का उत्पादन और पैकेजिंग कर बाजार में विक्रय कर रही हैं। शासन द्वारा महिलाओं को तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग के लिए दक्ष बनाया गया। वर्तमान में उनके उत्पाद विकासखण्ड के विभिन्न गांवों के किराना दुकानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कॉलेज, छात्रावास तथा जिला और राज्य स्तर पर आयोजित सरस मेलों में भी विक्रय किए जा रहे हैं। इस प्रयास से समूह की प्रत्येक महिला को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक की आमदनी प्राप्त हो रही है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे संसाधनों से बड़े बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही हैं। सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनकर समाज में नई पहचान बना सकती हैं।
जनपद पंचायत चारामा के सीईओ गोपाल सिंह कंवर ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य है। बीपीएम श्री साव ने बताया कि विकासखंड चारामा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अब तक 1600 से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। ये समूह कृषि, पशुपालन, लखपति दीदी योजना, आईएफसी योजना, ऑनलाइन एंट्री कार्य सहित विभिन्न सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से जुड़कर अपनी आय में लगातार वृद्धि कर रहे हैं।




