The youth of Jamgaon termed the police action a conspiracy to frame them, asking: “How could peace be disturbed in the very presence of the police?”
नरहरपुर/कांकेर जिले के नरहरपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम जामगांव में धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्राम निवासी हिमांशु तिवारी और गौरव शोरी ने प्रशासन पर उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब घटना के वक्त स्वयं पुलिस प्रशासन वहां मौजूद था, तो उन पर शांति भंग का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार है।
हिमांशु तिवारी और गौरव शोरी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 18 अक्टूबर (शनिवार) को बाजार में हुई घटना के दौरान नरहरपुर थाना प्रभारी सोमेश सिंह बघेल और पुलिस बल स्वयं वहां मौजूद थे। पीड़ित पक्ष का कहना है, “जब हम पुलिस प्रशासन के साये में थे, तो हम कानून का उल्लंघन कैसे कर सकते हैं? धारा 125 और 135 (3) के तहत की गई यह कार्रवाई केवल हमें डराने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का एक जरिया है। हम पूरी तरह निर्दोष हैं और हमें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।”
मामले की जड़ ग्राम सभा द्वारा लिया गया एक सामूहिक निर्णय है। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था कि धर्मांतरण करने वाले परिवारों से कोई सामाजिक या आर्थिक लेन-देन नहीं किया जाएगा। इसी नियम के तहत शनिवार को कुछ दुकानों को बंद कराने की बात हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि भीम आर्मी से जुड़े कुछ बाहरी लोगों ने गांव में आकर गाली-गलौज की और ग्राम सभा के नियमों का उल्लंघन किया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने 19 अक्टूबर (रविवार) को ही नरहरपुर थाने में उपस्थित होकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों की शिकायत पर अब तक कोई ठोस जांच शुरू नहीं की गई है, बल्कि इसके विपरीत हिमांशु और गौरव को बार-बार तहसील बुलाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
“गांव के महिला और पुरुष दुकान बंद कराने गए थे, लेकिन एफआईआर केवल हम दो लोगों के नाम पर क्यों? हमें फंसाने के लिए शांति भंग की धाराएं लगाई गई हैं। प्रशासन को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।”
इस एकतरफा कार्रवाई से जामगांव के ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन स्थानीय संस्कृति और ग्राम सभा के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय निर्दोष युवाओं को निशाना बना रहा है। यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर झूठी धाराएं नहीं हटाई गईं, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



