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जिला मुख्यालय के सबसे बड़े जिला अस्पताल में लापरवाही का आलम, पोस्टमार्टम नहीं होने से मृतक के परिजनों ने मचाया हंगामा 

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जांजगीर चांपा । यूं तो जांजगीर-चांपा जिला नया बना जिला नहीं है और ना ही बीच जंगलों से घिरा जिला है। संभाग मुख्यालय बिलासपुर से मात्र 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जांजगीर–चांपा जिले को बने हुए ढाई दशक से भी अधिक समय बीत चुका है। बावजूद इसके यहां स्वास्थ्य सेवाओं की लचर स्थिति है। जिला बनने के बाद यहां कई कलेक्टर, कई सीएमएचओ,कई सिविल सर्जन पदस्थ हुए,यहां से चुनाव जीत कर कई नेताओं ने राज्य की राजनीति में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अपना दबदबा भी बनाया है,पर जिले के स्वास्थ्य सुविधाओं की बढ़ोतरी में इसका कोई खासा फर्क पड़ता नहीं दिखता। और ना ही डीएमएफ के मद से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए की जा रही भर्ती और खर्च का कोई विशेष लाभ होता दिख रहा है।

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ऐसा ही एक मामला आज जांजगीर जिले के सबसे बड़े सरकारी जिला अस्पताल से देखने को मिला है। यहां आत्महत्या के बाद एक युवक का शव पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था,पर स्वीपर नहीं होने से युवक का घंटों पीएम नहीं हो सका। जिसके चलते मृतक के परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया। काफी समय तक यहां परिजन हंगामा करते रहे।

 

दरअसल जिला अस्पताल में स्वीपर पदस्थ नहीं है। जिस वजह से यहां पीएम के लिए बाहर से स्वीपर बुलाया जाता है। पर बाहर से जब तक के स्वीपर नहीं आ जाता तब तक यहां पीएम नहीं हो पाता। जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के बिरगहनी गाँव में एक युवक ने घर में फांसी लगा ली थी। जिसे पीएम के लिए पुलिस ने जिला अस्पताल पहुंचाया था। पर यहां स्वीपर नहीं होने से पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। जिससे नाराज परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों के हंगामा के बाद काफी समय के बाद पोस्टमार्टम शुरू किया गया।

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