झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल ही है जीवन बचाने का सबसे सुरक्षित रास्ता
रायगढ़, जिले में सर्पदंश से बचाव एवं जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में लोगों को सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया जा रहा है। बरसात के मौसम में खेत, खलिहान, बाड़ी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे सर्पदंश के मामलों में भी वृद्धि होती है। स्वास्थ्य विभाग के लगातार प्रयासों और ग्राम स्तर पर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का सकारात्मक असर अब दिखाई देने लगा है। लोगों में अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है और अब सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक, बेगा-गुनिया या घरेलू उपचार के बजाय सीधे अस्पताल पहुंचने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को एंटी-स्नेक वेनम एवं आवश्यक चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अनेक लोगों की जान बचाई जा रही है। विभाग ने आमजन से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में किसी भी प्रकार की झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय बिल्कुल भी बर्बाद न करें और मरीज को तत्काल नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैंकरा ने बरसात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। खेतों और बाड़ियों में कार्य करते समय जूते एवं सुरक्षात्मक वस्त्रों का उपयोग करें, रात में घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का प्रयोग करें, जमीन पर सोने से बचें तथा मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें। इसके साथ ही घर और आसपास की झाड़ियों, कचरे तथा अनुपयोगी वस्तुओं की नियमित साफ-सफाई बनाए रखें, ताकि सांपों के छिपने की संभावना कम हो और सर्पदंश की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।



