प्रमोद अवस्थी मस्तूरी
मस्तूरी। मस्तूरी के पुरानी बस्ती में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा में पंडित आलोक मिश्रा जी ने गोवर्धन पूजा और चीर हरण प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वर्णन किया। गोवर्धन लीला के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का नाश कर प्रकृति, गौसेवा और धर्म की रक्षा का संदेश दिया। वहीं चीर हरण प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने इसे आत्मा के पूर्ण समर्पण, निष्कपट भक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। कथा के दौरान उनके मधुर वचनों और सरल शैली ने श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। कथा पंडाल में उपस्थित भक्त श्रीकृष्ण के भक्ति रस में डूब गए और वातावरण जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसपान करते रहे तथा अंत में सभी ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। कथा में फेकू सिंह, बलवंत सिंह, धनी सिंह, रेवा राम यादव, जनक तिवारी, भोला राम यादव, गोविंद जैसवानी, तथा भारी संख्या मे श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।



