मैदानी जांच में चिन्हित बच्चों का जिला अस्पताल में हुआ विशेषज्ञ परीक्षण
रायगढ़, बच्चों में छिपी स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज जिला चिकित्सालय रायगढ़ में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में रायपुर से आए हृदय, तंत्रिका तंत्र, त्वचा तथा नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञों ने बच्चों की जांच की और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले की स्वास्थ्य टीमें लगातार आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों का भ्रमण कर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। इसी दौरान जिन बच्चों में किसी बीमारी अथवा शारीरिक समस्या के लक्षण दिखाई देते हैं, उन्हें आगे की जांच के लिए चिन्हित किया जाता है। जिले के विभिन्न विकासखंडों से ऐसे ही चिन्हित बच्चों को उनके पालकों के साथ आज जिला चिकित्सालय लाया गया। इससे बच्चों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हुईं और गंभीर अथवा जन्मजात बीमारी की स्थिति में आगे के उपचार की प्रक्रिया शुरू करने में आसानी हुई। शिविर में हृदय संबंधी समस्याओं की जांच पर विशेष जोर रहा। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. टी.डी. मखीजा ने बताया कि कुछ बच्चों में जन्म से ही हृदय संबंधी समस्या होती है, लेकिन शुरुआती दौर में उसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए बच्चों में दिखाई देने वाले कुछ सामान्य लक्षणों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सांस लेने में परेशानी, खाना-पीना खाते समय सांस फूलना, जल्दी थक जाना, पर्याप्त भोजन नहीं कर पाना अथवा उम्र के अनुसार शारीरिक विकास नहीं होना जैसे लक्षणों वाले बच्चों की हृदय संबंधी दृष्टि से भी जांच आवश्यक है।
हृदय में छेद सहित जन्मजात बीमारियों की हुई जांच
विशेषज्ञों द्वारा बच्चों में एएसडी, वीएसडी, पीडीए सहित विभिन्न जन्मजात हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान के लिए जांच की गई। हृदय में छेद अथवा अन्य जन्मजात समस्या पाए जाने पर बच्चों को आवश्यकतानुसार आगे की विशेषज्ञ चिकित्सा के लिए रायपुर भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पात्र बच्चों के निःशुल्क उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी। इस तरह शिविर केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को उपचार तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था से जोड़ा गया।
हृदय के साथ तंत्रिका, त्वचा और नाक-कान-गला रोगों की भी जांच
शिविर में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. टी.डी. मखीजा के साथ तंत्रिका रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष कुमार अंशु, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. महिमा कंवरानी तथा नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. स्नेहा मेरी ने बच्चों की जांच की। विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बच्चों की विशेषज्ञों ने जांच कर उनके पालकों को बीमारी की स्थिति, आवश्यक सावधानियों और आगे की उपचार प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी।
चिन्हित बच्चों को उपचार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य टीम की
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भानु पटेल ने बताया कि विशेषज्ञ जांच के बाद जिन बच्चों में बीमारी की पुष्टि होगी, उन्हें आवश्यकता के अनुसार श्री बालाजी हॉस्पिटल, रायपुर अथवा अन्य उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि बच्चों और उनके पालकों को उपचार की आगामी प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बच्चों को संबंधित अस्पताल तक पहुंचाने और उपचार के बाद घर तक पहुंचाने में भी स्वास्थ्य टीम सहयोग करेगी।
नियमित जांच से समय रहते सामने आ रही बच्चों की स्वास्थ्य समस्याएं
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से जिले में बच्चों की स्वास्थ्य जांच लगातार की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में प्रारंभिक जांच के बाद संदिग्ध मामलों को जिला स्तर पर विशेषज्ञों के पास लाया जाता है। इससे ऐसी बीमारियों की पहचान संभव हो रही है, जिनका समय पर उपचार मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य और सामान्य विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल बच्चों की बीमारी की पहचान, विशेषज्ञ परामर्श और उपचारकृतीनों को एक ही व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शिविर में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भानु पटेल, डॉ. जाविद मारिकर, डॉ. सुमित कुमार, डॉ. राजेश मिश्रा, सीमा बरेठ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।




