CG News:- जब आज की दौड़ में हर कोई अपने हिस्से की कामयाबी तलाश रहा है, तब सोंठी की शिक्षिका ममता जायसवाल ने अपना वक्त और संसाधन बच्चों के भविष्य के नाम कर दिया। पिछले आठ वर्षों से अपने खर्चे पर घर में निःशुल्क समर कैंप चलाकर करीब 300 बच्चों की जिंदगी में सीखने और आगे बढ़ने की उम्मीद जगाने वाली ममता अब राज्य स्तरीय राज्यपाल पुरस्कार 2026 के लिए चयनित हुई हैं। किताबों से आगे बढ़कर बच्चों के हुनर, आत्मविश्वास और सपनों को संवारने वाली इस शिक्षिका को शिक्षक दिवस पर राजभवन रायपुर में राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया जाएगा।
जाँजगीर चांपा। कुछ शिक्षक सिर्फ स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकलकर शिक्षा को मिशन बना देते हैं। शासकीय प्राथमिक शाला सोंठी की शिक्षिका ममता जायसवाल इसी मिसाल का नाम हैं। सीमित संसाधनों के बीच बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाने से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की मदद और अपने घर में निःशुल्क समर कैंप चलाने तक, उनके प्रयासों को अब राज्य स्तर पर पहचान मिली है। ममता जायसवाल का चयन राज्य स्तरीय राज्यपाल पुरस्कार 2026 के लिए किया गया है।
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें राजभवन रायपुर में राज्यपाल के हाथों शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए चयन की खबर सामने आते ही शिक्षा जगत और उनके स्कूल परिवार में खुशी का माहौल है।
ममता जायसवाल ने शैक्षणिक नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अलग राह अपनाई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण, शिक्षण-अधिगम सामग्री और नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के जरिए बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने का काम किया। उनका प्रयास सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सीखने की क्षमता विकसित करने पर भी रहा।
स्कूल से आगे बढ़कर घर को बना दिया बच्चों की पाठशाला
ममता जायसवाल के शिक्षा के प्रति समर्पण की सबसे खास बात उनका पिछले आठ वर्षों से अपने खर्चे पर घर में निःशुल्क समर कैंप चलाना है। इस कैंप के जरिए अब तक करीब 300 बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।
समर कैंप में बच्चों को बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाता है। बच्चों के भीतर छिपे हुनर को सामने लाने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने और उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को मिल रहा है।
कमजोर बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ मदद का भी सहारा
आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े बच्चों के लिए भी ममता जायसवाल लगातार काम कर रही हैं। वे ऐसे बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ उनकी मदद भी करती हैं। गांव में सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से लोगों को शिक्षा से जोड़ने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए माहौल तैयार करने का प्रयास उनके काम की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा है।
यही वजह है कि उनके काम को केवल स्कूल स्तर की उपलब्धि नहीं माना गया, बल्कि शिक्षा, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में उनके प्रयासों को लगातार सम्मान मिलता रहा है।
पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
ममता जायसवाल को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए पहले भी कई पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण शिक्षादूत सम्मान से नवाजा जा चुका है। जिले के कलेक्टर द्वारा उन्हें एफएलएन में उत्कृष्ट कार्य और समर कैंप में बेहतर कार्य के लिए भी सम्मानित किया जा चुका है।
इसके अलावा ब्लॉक स्तर सहित विभिन्न संगठनों द्वारा भी उनके कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत किया जा चुका है। अब राज्य स्तरीय राज्यपाल पुरस्कार 2026 के लिए उनका चयन उनकी शिक्षा यात्रा में एक और बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
ओडी दीवान स्कूल सोंठी ने ममता को किया सम्मानित
राज्यपाल पुरस्कार 2026 के लिए चयनित किए जाने की घोषणा के बाद ओडी दीवान स्कूल सोंठी में शिक्षिका ममता जायसवाल का सम्मान किया गया। शिक्षक दिवस के अवसर पर स्कूल परिवार की ओर से उन्हें शाल, श्रीफल एवं पेन भेंट किया गया।
स्कूल परिवार ने उनके शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। सम्मान समारोह में चेयरमैन महेंद्र धर दीवान, डायरेक्टर तन्मय धर दीवान, प्राचार्य रजनी दुबे, सुशील शर्मा, शिवप्रकाश जायसवाल सहित स्कूल का स्टाफ मौजूद रहा।
ममता जायसवाल की कहानी इस बात की मिसाल है कि संसाधन सीमित हों तो भी इरादे बड़े हों, तो बदलाव की शुरुआत की जा सकती है। स्कूल की कक्षा से लेकर अपने घर में लगाए गए आठ साल के समर कैंप तक, उन्होंने बच्चों के लिए सीखने और आगे बढ़ने के अवसर तैयार किए। अब उसी समर्पण को राजभवन में राज्यपाल पुरस्कार के रूप में राज्य स्तरीय पहचान मिलने जा रही है।



