कांकेर:- नगर पालिका परिषद कांकेर में हाल ही में गठित ‘प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल’ पीआईसी में अनुसूचित जाति एससी वर्ग के निर्वाचित जनप्रतिनिधि को स्थान न दिए जाने पर समाज में भारी असंतोष व्याप्त है।
इस विषय को लेकर भारतीय बौद्ध महासभा कांकेर द्वारा भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष दिनेश रजक को एक ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द इस वर्ग के पार्षद को पीआईसी में शामिल करने की मांग की गई है। सौंपे गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि कांकेर नगर पालिका क्षेत्र के 21 वार्डों में से सुभाष वार्ड और जनकपुर वार्ड अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। शहर में लगभग 15 प्रतिशत आबादी इसी वर्ग की है।
नगर पालिका परिषद की सुदीर्घ परंपरा रही है कि इस समाज से निर्वाचित कम से कम एक पार्षद को पीआईसी में प्रतिनिधित्व दिया जाता रहा है, ताकि समाज के हितों और विकास कार्यों की प्रभावी पैरवी हो सके।
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय—तीनों स्तरों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार कार्यरत है, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम करती है। इसके बावजूद, वर्तमान पीआईसी गठन में सामान्य, अनुसूचित जनजाति एससी और अन्य पिछड़ा वर्ग के पार्षदों को तो जगह मिली, लेकिन एससी वर्ग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
भारतीय बौद्ध महासभा ने सामाजिक संतुलन और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु तुरंत एससी वर्ग के निर्वाचित पार्षद को पीआईसी सदस्य बनाने की मांग की है समाज के प्रतिनिधित्व मण्डल ने कहा अगर मांग पूरी नहीं होती है तो संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेगा जरूरत पड़ने पर अनुसूचित जाति आयोग में भी पूरा समाज अपनी मांग को रखेगा।



