‘Mayank’ could not be saved, lost the battle of life, even the prayers of innocent people did not help
जिले के जनेह थाना क्षेत्र अंतर्गत मानिका गांव में पिछले 30 घंटे से अधिक बोरवेल में फंसे 6 वर्ष के मासूम मयंक आदिवासी को बचाने का रेस्क्यू मिशन चला। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ सहित जिला प्रशासन की टीम के भारी भरसक प्रयास के बावजूद भी मासूम को नहीं बचाया जा सका।
गौरतलब है कि बीते 12 अप्रैल को दोपहर 3:00 बजे करीब कुछ बच्चों के साथ मयंक आदिवासी खेत में गेहूं की बिखरी हुई बालियों को बीनने के दौरान अचानक एक खुले बोरवेल में गिर गया था। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और कुछ समय बाद ही रेस्क्यू ऑपरेशन चला दिया गया था।
30 घंटे बाद बाहर निकला
जिला प्रशासन एनडीआरएफ एसडीआरएफ की टीम लगातार 30 घंटे से अधिक समय रेस्क्यू ऑपरेशन करने के बाद मंयक आदिवासी को बाहर निकाला गया। तुरंत उसे डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले जाया गया लेकिन जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक मयंक आदिवासी का शव त्योथर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है।
नहीं काम आई लोगों की दुआएं
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार सिंह सीएमएचओ एसडीओपी थाना प्रभारी एनडीआरएफ एसडीआरएफ के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही है। लाख प्रयास एवं लोगों की दुआओं के बावजूद भी 6 वर्ष के मासूम मयंक आदिवासी को नहीं बचाया जा सकता।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल हालात का लिया था जायजा
इस घटना को लेकर प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव जिला प्रशासन से बात कर रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मनिका गांव में रेस्क्यू के दौरान प्रदेश की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी प्राप्त की थी। साथ ही जिला पुलिस प्रशासन रेस्क्यू ऑपरेशन में हर संभव मदद का आश्वासन दिया था।
बोरवेल में फंसे 6 साल के मासूम बच्चे को आखिरकार बाहर निकाल लिया गया है. 6 साल के मयंक को फौरन एंबुलेंस से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र रवाना कर दिया गया है. एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने 40 घंटे से ज्यादा चले ऑपरेशन के बाद बच्चे को बाहर निकाला. बच्चे की जान बचाने लिए पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही थी. एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम बोरवेल के पास खुदाई कर रही थी. टीम ने सफेद चादर में ढंकी हुई मासूम की बॉडी बोरवेल से बाहर निकाली.
मासूम के बोरवेल में गिरने के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था. अपने बेटे की याद में मां बेसुध थी, तो वहीं दादी की आंखें भी पोते को खोज रही थी. ग्रामीण भी लगातार मौके पर डंटे हुए थे. पुलिस के साथ प्रशासन की टीम भी मासूम को सही सलामत बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन फिर भी बच्चे की जान नहीं बच पाई.



