Due to the vigilance of the Chirayu team, three innocent children got a new life, there is an atmosphere of happiness among the family members
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – जिले के ग्राम कुटरू और ग्राम केतुलनार में चिरायु टीम के भ्रमण के दौरान दो अलग-अलग मामलों में गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार दिलाया गया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी। चिरायु योजना के अंतर्गत किए गए इस मानवीय प्रयास ने न केवल मासूमों को नया जीवन दिया, बल्कि उनके परिवारों और गांव में भी नई आशा का संचार किया।
चिरायु टीम के भ्रमण के दौरान ग्राम कुटरू स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में अध्ययनरत करण साहू (उम्र 7 वर्ष) को जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित पाया गया। 13 मार्च 2025 को जिला अस्पताल में जांच के उपरांत रोग की पुष्टि हुई। तत्पश्चात करण को सत्य साई संजीवनी अस्पताल, नया रायपुर रेफर किया गया, जहां 27 मार्च को ओपन हार्ट सर्जरी की गई। 3 अप्रैल को टांके निकाले गए और 28 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी दी गई। हालांकि ऑपरेशन के स्थान पर संक्रमण के कारण करण को 3 मई को पुनः भर्ती करना पड़ा, और 26 मई तक उपचार चला। अब करण पूर्णतः स्वस्थ है और स्कूल लौट चुका है। इसी प्रकार, ग्राम केतुलनार के छोटे किलेपाल पारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में भ्रमण के दौरान सुरेश कुहरामी (उम्र 2 वर्ष) और रैनु कुहरामी (उम्र 4 वर्ष) को चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता महसूस की गई। सुरेश को सिर पर पायोडर्मा और अति कुपोषण से पीड़ित पाया गया, जबकि रैनु को गर्भनाल ग्रेनुलोमा की समस्या थी। दोनों बच्चों को 12 जून को जिला अस्पताल रेफर किया गया। रैनु को 17 जून को डीकेएस अस्पताल, रायपुर में भर्ती किया गया और 18 जून को उसका सफल ऑपरेशन हुआ। 20 जून को रैनु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं सुरेश को मेकाहारा रायपुर के डर्मेटोलॉजी विभाग में दिखाया गया, जहां उसे आवश्यक दवाइयां दी गईं और उसकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। सरकारी योजनाओं, समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों और चिरायु टीम की सजगता के चलते इन तीन मासूम बच्चों को नया जीवन मिला। बच्चों के ठीक होने से उनके माता-पिता, परिजन एवं ग्रामीणजनों में अपार हर्ष का माहौल है। इस पहल ने यह सिद्ध किया कि समय पर की गई पहचान और समुचित इलाज से ग्रामीण अंचलों में भी गंभीर बीमारियों को मात दी जा सकती है। चिरायु योजना गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए एक वरदान साबित हो रही है, जो स्वास्थ्य के अधिकार को साकार कर रही है और गांवों में नई उम्मीद जगा रही है।



