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सॉफ्टबॉल की आड़ में भ्रमजाल: वायरल वीडियो और आरोपों से ध्यान भटकाने जनसंपर्क का सहारा?

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पृथक किए खेल प्रभारी का नाम शामिल बना विवाद, प्रतिष्ठित अखबारों और चैनलों ने चलाया खबर खेल विभाग ने नहीं किया जारी

बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – 12 जुलाई 2025 को एशिया कप सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप को लेकर 12 जुलाई को जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी की गई खबर अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। खबर में बीजापुर की खिलाड़ी के चयन के साथ-साथ जिले के श्रम निरीक्षक सोपान कर्णेवार को भारतीय टीम का कोच नियुक्त किए जाने का उल्लेख था। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया पर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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दरअसल, सोपान कर्णेवार पर पूर्व में गंभीर आरोप लगे हैं यहां पूरा मामला 3 जुलाई 2025 के वायरल वीडियो भी सामने आ चुका है, एक स्कूटी में दो बच्चियों को सहायक कोच के द्वारा कन्या छात्रावास बीजापुर आश्रम में छोड़ते देखें इस पूरे मामले में संबंधित अधीक्षका ने कहा था कि सॉफ्टबॉल के कोच के कहने पर दो छात्राएं मूवी देखने के लिए गई थी इसकी जानकारी बच्चों के द्वारा जब दिया गया तो संबंधित अधीक्षका ने सोपान कर्णेवार को फोन पर पुछा कि इतना समय नहीं दे सकते परमिशन उन्होंने खुद जिम्मेदारी लेने जैसे बातें बताया और खुद जिम्मेदारी ली तब जाकर बच्चों को छोड़ा गया, रात के 12:30 बजे बच्चे स्कूटी से पहुंचने जैसा गंभीर मामला दिखा ।

खेल अधिकारी की मानें तो जिसकी जांच लंबित बताई जा रही है। इसके बावजूद उन्हें दोबारा राष्ट्रीय टीम का कोच बनाए जाना और उनके पक्ष में खबरें प्रमुखता से प्रकाशित होना, संदेह को जन्म दे रहा है।

सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर है कि जनसंपर्क को जिस प्रेस विज्ञप्ति के जरिए बधाई संदेश भेजा गया, उसमें 4 जुलाई 2025 को खेल विभाग से पृथक किए जा चुके अधिकारी डिप्टी कलेक्टर नारायण प्रसाद गवेल का नाम शामिल कर भेजा गया। हैरानी की बात यह है कि न तो वर्तमान खेल प्रभारी आदित्य कुंजाम को इस खबर की जानकारी थी और न ही पूर्व अधिकारी को यह मालूम था कि उनके नाम से बधाई जारी की गई है।

वर्तमान खेल प्रभारी आदित्य कुंजाम ने स्पष्ट किया है कि उनसे इस संबंध में कोई चर्चा नहीं की गई और यह खबर उनके संज्ञान में नहीं थी विभाग के द्वारा नहीं भेजा गया जनसंपर्क को खबर।

खेल जगत के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यह प्रचार अभियान कोच पर लगे आरोपों से ध्यान भटकाने का सुनियोजित प्रयास हो सकता है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है।

इस तरह की खबरें प्रकाशित करने भेजने पर जनसंपर्क की कार्यशाली पर भी सवाल उठ रहे हैं बाकि खबरे की सत्यता क्या रहती होगी क्या संबंधित विभाग को पता रहता है कई ऐसी बातें जिनके जवाब जनसंपर्क ही दे सकता है। या खबर प्रतिष्ठित बड़े अखबारों व टीवी चैनलों में प्रकाशित किया गया है ‌‌। इस पर कोई कार्रवाई होगा या इसे ठंडे बस्ते में डाला जाएगा।

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