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गांवों में फेरीवालों के साउंड से बढ़ रहा ध्वनि प्रदूषण, शैक्षणिक माहौल पर पड़ रहा असर

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सरसीवा – ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों फेरी लगाकर सामान बेचने वालों द्वारा तेज साउंड सिस्टम के उपयोग से ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। गांवों की गलियों में दाल, कपड़ा, रेडीमेड और कबाड़ बेचने वाले व्यापारी अपने साथ माइक या लाउड साउंड बॉक्स लेकर घूमते हैं, जिनमें या तो गाने बजते रहते हैं या रिकॉर्ड की हुई बिक्री की आवाजें तेज ध्वनि में सुनाई देती हैं।

इससे गांवों में शांति भंग हो रही है, वहीं शैक्षणिक संस्थानों और विद्यालयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि जब विद्यालयों में पढ़ाई चल रही होती है, तब बाहर फेरीवालों के लाउड साउंड के कारण बच्चों का ध्यान भटक जाता है और अध्ययन का वातावरण प्रभावित होता है।

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ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए और गांवों में साउंड सिस्टम लगाकर सामान बेचने पर रोक (बैन) लगानी चाहिए। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करवाते हुए केवल सीमित आवाज़ में बिक्री की अनुमति दी जाए ताकि न तो व्यवसाय प्रभावित हो और न ही गांव का शांति और शिक्षण माहौल।

लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि इस विषय पर ठोस कदम उठाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और शांति का माहौल कायम रह सके।

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