“बजट में कुछ नहीं, कई बार मांगकर थक गए… 10 हजार में 1500 तो खर्च ही हो जाते हैं”
बीजापुर @ रामचन्द्रम एरोला – आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच, छत्तीसगढ़ (जिला शाखा बीजापुर) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के केंद्रीय व राज्य मंत्रियों के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन क्रमांक 52/26, दिनांक 26 फरवरी 2026 को तहसीलदार पंचराम सलामे के माध्यम से प्रेषित किया गया। ज्ञापन में बताया गया है कि आईसीडीएस योजना की स्थापना के लगभग 50 वर्ष बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं मानदेय के आधार पर कार्य कर रही हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा कार्यकर्ताओं को 4500 रुपये तथा सहायिकाओं को 2250 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जिसे वर्तमान महंगाई के दौर में अत्यंत कम बताया गया है। वर्ष 2018 के बाद से मानदेय में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं होने पर भी नाराजगी जताई गई।
मंच का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। पोषण अभियान, टीकाकरण, सर्वे कार्य, निर्वाचन ड्यूटी, कोविड-19 जैसी आपदा के समय तथा एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण सर्वे में भी इन्होंने सक्रिय सहयोग दिया है। इसके बावजूद उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिली हैं।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि “एक तरफ हमें 10 हजार रुपये के आसपास मानदेय मिलता है, जिसमें से लगभग 1500 रुपये डाटा रिचार्ज, यात्रा और अन्य कार्यों में खर्च हो जाते हैं। बाकी बचे पैसों में परिवार का गुजारा कैसे होगा?” उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार मांग रखने के बावजूद बजट में उनके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
प्रमुख मांगें
1. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
2.शासकीयकरण तक कार्यकर्ताओं को 26,000 रुपये एवं सहायिकाओं को 17,100 रुपये प्रतिमाह वेतन स्वीकृत किया जाए तथा प्रतिवर्ष 1000 रुपये की वृद्धि की जाए।
3.सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त ग्रेच्युटी, मासिक पेंशन, समूह बीमा तथा आकस्मिक मृत्यु पर सहायता राशि के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि 8 मार्च 2026 तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 9 मार्च 2026 को एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं रायपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगी। इससे पूर्व 26 और 27 फरवरी को दो दिवसीय कार्य बहिष्कार कर प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगामी जनगणना सहित अन्य महत्वपूर्ण सर्वे कार्यों में सहयोग करना कठिन होगा, जिससे शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है।
जिला अध्यक्ष ने शासन से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र निराकरण करने की अपील की
अधिकारी के बयान जानने की कोशिश किया गया पर ऑफिस में अधिकारी मौजूद नहीं थे दौरा बताया गया, खबर लिखें जाने तक




