बीजापुर@ रामचन्द्रम एरोला –
छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील और दुर्गम जिलों में शामिल बीजापुर में वर्षों से अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे प्रभारी राजस्व निरीक्षकों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया है। वर्ष 2020 से प्रभारी राजस्व निरीक्षक के रूप में कार्य कर रहे वरिष्ठ पटवारियों ने सामूहिक रूप से अपने प्रभार से मुक्त किए जाने की मांग करते हुए इस्तीफा सौंप दिया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों सरकारों के कार्यकाल में उनसे राजस्व निरीक्षक का पूरा काम लिया गया, लेकिन न पदोन्नति मिली और न ही अतिरिक्त जिम्मेदारी के अनुरूप मानदेय।
प्रभारी राजस्व निरीक्षकों का कहना है कि पिछले लगभग छह वर्षों से वे राजस्व निरीक्षक के सभी दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। बीजापुर, गंगालूर, भैरमगढ़, नेलसनार, कुटरू, भोपालपटनम, मद्देड, उसूर और बासागुड़ा जैसे दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने शासन-प्रशासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वन अधिकार पत्र वितरण, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, राजस्व प्रकरणों के निराकरण तथा विभिन्न शासकीय अभियानों के सफल संचालन में इन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार जैसे विशेष अभियानों में भी उन्होंने गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याओं के समाधान और योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम योगदान दिया।
*बीजापुर जिले का जिम्मा अप्रशिक्षित राजस्व निरीक्षकों के कंधों में कई वर्षो से करा रहे हैं,काम तब नियम कहां था?*
राजस्व निरीक्षकों का कहना है
कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पहुंचना आज भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों के बीच भी उन्होंने प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समन्वय स्थापित कर शासन की योजनाओं को सफल बनाया। इसके बावजूद वर्षों की सेवा और अतिरिक्त जिम्मेदारी के बाद भी उन्हें नियमित पदोन्नति या विशेष मानदेय का लाभ नहीं मिल सका।
2020 में प्रभारी राजस्व निरीक्षक के रूप में मिली थी जिम्मेदारी
कार्यालय कलेक्टर, बीजापुर के आदेश क्रमांक 617/कले./भू.अ./स्था./2020 दिनांक 27 अगस्त 2020 के अनुसार 20 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके योग्य पटवारियों को उनके हल्कों से मुक्त कर प्रभारी राजस्व निरीक्षक के रूप में पदस्थ किया गया था। इनमें कई वरिष्ठ पटवारियों को विभिन्न राजस्व निरीक्षक मंडलों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार पटवारी जीवन सिंह कुंजाम को पटवारी हल्का क्रमांक 20 उड्डातामल्ला से राजस्व निरीक्षक मंडल उसूर, हितेंद्र पामभोई को चेरपल्ली से भोपालपटनम, शंकरलाल कटलाम को डोडीतुमनार से गंगालूर, के.जी. यशवंतराव को तर्रेम से बासागुड़ा तथा अन्य वरिष्ठ पटवारियों को विभिन्न राजस्व निरीक्षक मंडलों में पदस्थ किया गया था।
जिले में 16 पद स्वीकृत, फिर भी पदोन्नति नहीं जानकारी के अनुसार बीजापुर जिले में राजस्व निरीक्षक के कुल 16 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 14 पद भरे हुए हैं जबकि 2 पद रिक्त हैं। इसके बावजूद कई वर्षों से प्रभारी राजस्व निरीक्षक के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पटवारियों को नियमित पदोन्नति नहीं दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे वर्षों से राजस्व निरीक्षक का पूरा कार्य लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें न तो पदोन्नति का लाभ मिला और न ही अतिरिक्त दायित्वों के अनुरूप कोई मानदेय। शासन का तर्क है कि राजस्व निरीक्षक परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना नियमित राजस्व निरीक्षक नहीं बनाया जा सकता, लेकिन कर्मचारियों का सवाल है कि जब बिना प्रशिक्षण और नियमित पदोन्नति के उनसे वर्षों तक राजस्व निरीक्षक का कार्य लिया जा सकता है, तो उन्हें पदोन्नति का लाभ देने में विलंब क्यों किया जा रहा है।
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प्रभारी राजस्व निरीक्षकों की वर्तमान सूची बीजापुर तहसील, बीजापुर हल्का – पनेश्वर सिंह ठाकुर, गंगालूर तहसील, गंगालूर हल्का – शंकरलाल कटलाम,
भैरमगढ़ तहसील, भैरमगढ़ हल्का – श्रवण कुमार गुप्ता, भैरमगढ़ तहसील, नेलसनार हल्का – अनिल कुमार भास्कर, कुटरू तहसील, कुटरू हल्का – विजेन्द्रपाल शाह , भोपालपटनम तहसील, भोपालपटनम हल्का – हितेंद्र कुमार पामभोई, भोपालपटनम तहसील, मद्देड इस हल्का – सुनील कुमार गुरला
उसूर तहसील, उसूर हल्का – रवीन्द्र कुमार पुजारी, उसूर तहसील, बासागुड़ा हल्का – जीवन सिंह कुंजाम, कलेक्टर भू-अभिलेख कार्यालय, बीजापुर – के.जी. यशवंतराव प्रशासन के लिए बन सकती है चुनौती, प्रभारी राजस्व निरीक्षकों के अनुसार सरकारें बदलती रहीं, योजनाएं और अभियान बदलते रहे, लेकिन उनकी मांगें और समस्याएं जस की तस बनी रहीं। लगातार अनदेखी और उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने सामूहिक रूप से प्रभार छोड़ने का निर्णय लिया है। यदि जिले में प्रभारी राजस्व निरीक्षकों को उनके अतिरिक्त दायित्वों से मुक्त किया जाता है, तो राजस्व व्यवस्था, सीमांकन, नामांतरण, वन अधिकार पत्रों से जुड़े कार्यों और विभिन्न प्रशासनिक अभियानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बीजापुर जैसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जिले में राजस्व अमले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और राज्य शासन पर टिकी हैं कि वर्षों से अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे इन कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। एक बात स्पष्ट है कि दुर्गम जंगलों, दूरस्थ गांवों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शासन का भरोसा बनकर काम करने वाले इन अधिकारियों की सामूहिक नाराजगी अब केवल पदोन्नति का मुद्दा नहीं, बल्कि मेहनत, सम्मान और अधिकार की मांग बनकर सामने आई है।



