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शासकीय प्रैक्टिसिंग प्राथमिक पाठशाला कांकेर ने पूरे किए 100 वर्ष, धूमधाम से मनाया गया शताब्दी समारोह-2026

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शाला प्रवेश उत्सव के साथ नवप्रवेशी बच्चों का किया गया स्वागत, विद्यार्थियों को गणवेश व पुस्तकों का वितरण

उत्तर बस्तर कांकेर, शासकीय प्रैक्टिसिंग प्राथमिक पाठशाला कांकेर के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज शताब्दी समारोह-2026 एवं शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री आशाराम नेताम ने कहा कि विद्यालय के 100 वर्ष पूर्ण होना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव और हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अच्छा व्यवहार और नैतिक मूल्यों की जानकारी देना भी आवश्यक है। विद्यालय में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की बात भी कही। शासकीय प्रैक्टिसिंग प्राथमिक शाला कांकेर में कक्षा पहली से तीसरी तक अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं प्रारंभ होने की जानकारी भी उनके द्वारा दी गई। कार्यक्रम को हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत एवं नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक ने भी संबोधित किया। उन्होंने विद्यालय के गौरवशाली इतिहास और शिक्षा के क्षेत्र में इसके योगदान की सराहना की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक श्री नेताम द्वारा नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें गणवेश एवं पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। वहीं कक्षा 9वीं की छात्राओं को सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत साइकिल प्रदान की गई। विधायक श्री नेताम द्वारा भूतपूर्व शिक्षकों को साल एवं श्रीफल से सम्मानित भी किया गया।

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शताब्दी समारोह में विद्यालय के ऐतिहासिक सफर को याद करते हुए बताया गया कि वर्ष 1926 में स्थापित यह संस्था कांकेर की शिक्षा यात्रा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रही है। उस समय जब क्षेत्र में सीमित संसाधन थे, बैलगाड़ी, कच्ची सड़कें और लालटेन का दौर था, तब इस विद्यालय की स्थापना शिक्षा की नई उम्मीद के रूप में हुई थी। प्रैक्टिसिंग प्राथमिक पाठशाला नाम मिलने का कारण भी इसकी विशेष भूमिका रही है। यह विद्यालय केवल बच्चों की शिक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि भावी शिक्षकों के प्रशिक्षण की प्रयोगशाला भी रहा। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाने का अभ्यास करते थे और अनुभवी शिक्षक उनके शिक्षण कौशल का मूल्यांकन करते थे।

वर्ष 1926 से 1950 तक विद्यालय ने अनेक चुनौतियों के बीच शिक्षा की अलख जगाई। खपरैल की छत, चूने से पुती दीवारें, टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई और खड़िया से लिखे जाने वाले पाठ आज भी विद्यालय के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा हैं। समय के साथ विद्यालय ने आधुनिक सुविधाओं को अपनाया, खपरैल की जगह पक्की छत और टाट-पट्टी की जगह बेंच ने ले ली, लेकिन शिक्षा और संस्कार देने की परंपरा आज भी कायम है। विद्यालय की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया गया कि इस संस्था से अब तक एक लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, वहीं 500 से अधिक शिक्षकों ने यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत की है। यह विद्यालय तीन पीढ़ियों-दादा, पिता और बेटे की शिक्षा का साक्षी रहा है। शताब्दी समारोह ने विद्यालय के स्वर्णिम इतिहास, शिक्षकों के योगदान और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को याद करते हुए नई पीढ़ी को शिक्षा एवं संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम को सेवानिवृत्त प्रधानपाठक श्री नरेन्द्र सिंह ठाकुर, पूर्व छात्र श्री गोकुश जोशी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री उत्तम यादव, वार्ड पार्षद श्री मतीन खान एवं पार्षदगण, प्रधानपाठक प्राथमिक शाला श्री तुफैल अहमद, माध्यमिक शाला श्री शांतनु कलिहारी, हाई स्कूल श्री प्रतुल विश्वास सहित विद्यालय के पूर्व शिक्षक, पूर्व विद्यार्थी, जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, पालकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। शताब्दी समारोह का मंच संचालन शिक्षक श्री कुशलानंद गजबल्ला, श्री संजीत श्रीवास्तव, श्री लोकेश्वर साहू द्वारा किया गया।

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