👉 = कम ब्याज का झांसा देकर 1.03 लाख का लोन, अब 80 हजार ब्याज और 20 हजार क्लोजिंग चार्ज का आरोप; बजाज फाइनेंस लोरमी शाखा के खिलाफ शिकायत
मुंगेली/लोरमी। बजाज फाइनेंस कंपनी की लोरमी शाखा पर भ्रामक जानकारी देकर लोन स्वीकृत कराने, वास्तविक ब्याज एवं शर्तें छिपाने तथा लोन क्लोजिंग के नाम पर अतिरिक्त राशि मांगने के आरोप लगे हैं। ग्राम बुधवारा, पोस्ट नवाडीह निवासी पीतांबर टंडन ने थाना लोरमी में लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक मुंगेली, जिला कलेक्टर मुंगेली तथा जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक को भी भेजी गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बजाज फाइनेंस कार्यालय से उन्हें फोन कर बताया गया कि उनके नाम पर 1,03,000 का विशेष लोन ऑफर है। कम ब्याज और आसान शर्तों का भरोसा देकर उन्हें लोरमी शाखा बुलाया गया और लोन स्वीकृत करा दिया गया। उनका आरोप है कि लोन की वास्तविक ब्याज दर, कुल देय राशि, प्रोसेसिंग शुल्क और अन्य नियमों की पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई।
पीतांबर टंडन का कहना है कि जब लोन की राशि उनके खाते में पहुंची और उन्होंने भुगतान का पूरा विवरण जाना, तब उन्हें बताया गया कि तीन वर्ष की अवधि में लगभग 80,000 ब्याज देना होगा। उनका दावा है कि उन्हें पहले केवल लगभग 1.5 प्रतिशत ब्याज का भरोसा दिया गया था, जबकि बाद में वास्तविक भुगतान कहीं अधिक निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उन्हें पहले पूरी जानकारी दी जाती तो वे लोन स्वीकार नहीं करते।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने तत्काल लोन बंद (फोरक्लोज) कराने की बात कही तो शाखा से जुड़े संजय सोनवानी और योगेंद्र यादव द्वारा 20,000 की मांग की गई। उनका कहना है कि इस राशि का कोई स्पष्ट नियम या आधार उन्हें नहीं बताया गया।
शिकायत में शाखा प्रबंधक संजय सोनवानी एवं कर्मचारी योगेंद्र यादव की भूमिका की जांच की मांग की गई है। वहीं, कुछ स्थानीय सूत्रों एवं शिकायतकर्ता का दावा है कि इसी प्रकार की शिकायतें अन्य ग्राहकों से भी जुड़ी हुई हैं। आरोप है कि बजाज कार्ड धारकों को फोन कर विशेष ऑफर के नाम पर बुलाया जाता है, लेकिन ब्याज दर, कुल देय राशि और अन्य वित्तीय शर्तों की स्पष्ट जानकारी पहले नहीं दी जाती। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
इस संबंध में संवाददाता ने संजय सोनवानी एवं योगेंद्र यादव से मोबाइल फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानना चाहा। दोनों ने आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल प्रतिक्रिया दी। समाचार प्रकाशित होने तक बजाज फाइनेंस कंपनी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
अब पूरे मामले में पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं तथा किसी प्रकार के नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
पत्रकारिता की नजर से
यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय संस्थाओं द्वारा ग्राहकों को लोन देने की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि किसी ग्राहक को लोन स्वीकृत करने से पहले ब्याज दर, कुल देय राशि, फोरक्लोजर (Loan Closure) शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शर्तों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, तो यह उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
हालांकि, इस मामले में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। इनकी पुष्टि पुलिस जांच, बैंकिंग नियामकों अथवा अन्य सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही होगी। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो यह न केवल संबंधित कंपनी की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न होगा, बल्कि अन्य संभावित पीड़ितों के मामलों की भी जांच का आधार बन सकता है। वहीं, यदि कंपनी अपना पक्ष या दस्तावेज प्रस्तुत करती है, तो उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाना पत्रकारिता की निष्पक्षता का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
नोट:- यह समाचार शिकायतकर्ता के लिखित आवेदन, उसके आरोपों तथा संबंधित पक्ष से संपर्क के प्रयास पर आधारित है। आरोपों की सत्यता की पुष्टि सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही होगी। कंपनी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।



