उत्तर बस्तर कांकेर – जिले में मलेरिया संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला मलेरिया अधिकारी के मार्गदर्शन में सभी विकासखण्डों के गांवों में रैपिड फीवर सर्वे कराया जा रहा है।
मलेरिया के सकारात्मक प्रकरण पाए जाने पर पॉजिटिव मरीजों को स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं मितानिन द्वारा तत्काल दवा की पहली खुराक अपने सामने खिलाया जा रहा है। वहीं उल्टी-दस्त के मरीजों को ओआरएस एवं आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही है।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जिले के सभी आश्रम एवं छात्रावासों में विद्यार्थियों की मलेरिया जांच की गई है। संक्रमित छात्रों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षकों को सभी छात्रों के बिस्तरों में मच्छरदानी का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर मितानिनों के सहयोग से स्रोत नियंत्रण दल गठित किया गया है, जिनके द्वारा घर-घर जाकर पानी में उत्पन्न होने वाले मच्छरों के लार्वा को नष्ट किया जाएगा। साथ ही जिला एवं विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। मोबाइल नंबर 9406108750, 9685460365, 9407625341 एवं 8871459457 पर संपर्क किया जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.सी. ठाकुर ने आमजनों से अपील करते हुए कहा कि अपने घरों के आसपास गढ़़्ढ़ों एवं नालों में पानी जमा न होने दें, यदि पानी जमा है तो उसकी निकासी करवायें अथवा मिट्टी का तेल एवं जला हुआ मोबिल आयॅल डालें, जिससे मच्छर के लार्वा पानी मे ही नष्ट हो जाएंगे। सेप्टीक टेंक में लगे हुए पाईप को खुला न छोड़ें, उसके ऊपर जाली अनिवार्य रूप से लगवायें।
घर के आस-पास नारियल की खोल, डिस्पोजल, टूटे फूटे बर्तन, टायर, घर लिपाई के लिये घोला गया गोबर वाली हाण्डी या बाल्टी को भरकर न रखें। इन सभी में मच्छर के लार्वा दो से तीन दिनों में पनप कर वयस्क मच्छर बनते हैं। उनके द्वारा सभी नागरिकों को नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
जिले में दवा की उपलब्धता के अनुसार 01 अगस्त 2026 से मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया रोधी दवा छिड़काव प्रारंभ किया जाएगा। जहां भी दवा छिड़काव वाले दल आए तो सहयोग करें एवं घरों के अंदर छिड़काव कराएं। सोने वाले कमरे में अनिवार्य रूप से छिड़कान कराया जावे।



