Odisha in BJP Government: Political picture will change, Naveen Patnaik’s departure is certain after 24 years in Odisha, BJP has a decisive lead
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा में करीब 24 साल से सरकार चला रहे नवीन पटनायक सरकार की अब विदाई होनी तय है। रुझानों में भाजपा बहुमत पार कर चुकी है। उसके खाते में 78 सीटें गई हैं। वहीं, बीजद भी 54 सीटों पर आगे है। कांग्रेस के खाते में सिर्फ 11 सीटें गई हैं।
वहीं अन्य को तीन सीटें मिली हैं। विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा और बीजू जनता दल में आपसी तालमेल और गठबंधन की कोशिशें भी हुईं। लेकिन जब गठबंधन नहीं हो पाया तब भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सभी 147 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। ओडिशा विधानसभा चुनाव में आ रहे रुझानों में भारतीय जनता पार्टी बहुमत हासिल कर चुकी है। भाजपा 78 सीटों पर आगे चल रही है। बता दें कि राज्य में बहुमत के लिए 74 सीटों की जरूरत है।
आपको बता दें कि साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की 147 में से 117 सीटों पर जीत हासिल कर बीजद ने सरकार बनाई थी। जबकि, भाजपा के खाते में 23 सीटें आईं थीं और कांग्रेस को 9 सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी के अध्यक्ष नवीन पटनायक लगातार पांचवी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। पहली बार उन्होंने यह पद साल 2000 में संभाला था।
कांग्रेस को ओडिशा में 13 सीटें मिलती दिख रही है, राज्य में सीपीएम को 1 सीटें मिलती दिख रही है. 2 निर्दलीय उम्मीदवार भी ओडिशा में विजयी होते नजर आ रहे हैं.
अगर ओडिशा में आंकड़ों का यही ट्रेंड रहता है तो बीजेपी राज्य में पहली बार सरकार बनाएगी. चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी बार बार दोहरा रहे थे कि 10 जून को ओडिशा में बीजेपी का मुख्यमंत्री सत्ता पर काबिज होगा. मतगणना के अबतक के रुझान पीएम मोदी के दावों के अनुसार ही दिख रहे हैं.
बता दें कि नवीन पटनायक कभी एनडीए का ही हिस्सा हुआ करते थे. लेकिन 2009 में उन्होंने एनडीए से राहें जुदा कर ली थी. इसके बाद वे ओडिशा में अपने दम पर सरकार चला रहे थे. लेकिन एनडीए से उनके संबंध हमेशा ही सौहार्द्रपूर्ण और सहज रहे. इस बार चुनाव से पहले एक बार फिर चर्चा चली कि नवीन पटनायक एनडीए के पाले में आ सकते हैं, लेकिन सीट बंटवारे पर बात न बनने की वजह से दोनों पार्टियों की दोस्ती परवान नहीं चढ़ पाई.
ओडिशा में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने नवीन पटनायक पर हमला किया था. पीएम मोदी ने एक रैली में कहा था कि ‘आप नवीन बाबू को कहीं खड़े कर दीजिए और उनको बिना कागज लिए कहिए कि आप ओडिशा के जिलों के नाम बोलिए और जिलों के कैपिटल के नाम बोलिए. जो मुख्यमंत्री अपने जिलों के नाम बोल नहीं सकते. जो मुख्यमंत्री अपने जिलों के नाम नहीं जानते, वो आपके दुख दर्द जानते होंगे क्या? क्या उनके भरोसे आप अपने बच्चों को भविष्य छोड़ सकते हैं क्या?”
पीएम मोदी ने प्रचार अभियान के दौरान कहा था कि, ‘इसलिए मैं कहता हूं, ज्यादा नहीं मुझे पांच साल मौका दीजिए. अगर मैं पांच साल में आपके ओडिशा को नंबर वन ना बना दूं न तो कहना कि मोदी क्या कहकर गया था?’
इसके अलावा बीजेपी ने नवीन पटनायक के करीबी पूर्व आईएएस वीके पांडियान पर हमला किया था. पांडियान नवीन पटनायक के विश्वस्त सलाहकार हैं. हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान जब नवीन पटनायक भाषण दे रहे थे तो उनके हाथ हिल रहे थे, इस दौरान पांडियान उनके हाथ को संभालते नजर आए थे. पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर भी नवीन पटनायक पर निशाना साधा था और पूछा था कि 1 साल में नवीन पटनायक की तबीयत इतनी ज्यादा कैसे खराब हो गई. गृहमंत्री अमित शाह ने भी एक रैली में कहा था, ‘नवीन बाबू की तबियत सही नहीं है. वो सरकार नहीं चला रहे हैं, बल्कि तमिल बाबू इसे चला रहे हैं.’
वहीं सीएम नवीन पटनायक ने ओडिया अस्मिता का सवाल उठाया था. नवीन पटनायक ने कहा था कि मेरा कहना है कि ओडिशा के लोग चौबीस साल से यह बात अच्छे तरीके से जानते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री जी आप ओडिशा को कितना जानते हैं. ओडिया भाषा क्लासिकल भाषा होने के बाद भी इसे भूल गए. नवीन पटनायक ने आरोप लगाया था कि आपने एक हजार करोड़ संस्कृत भाषा के लिए दिए लेकिन ओडिया के लिए कुछ नहीं दिया.



