“I’ve never experienced such a traumatic event…” CJI’s anger erupts during acid attack hearing; learn about the 16-year-old case.
एसिड अटैक मामलों की लंबित सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। 16 वर्षों से लंबित इस मामले को लेकर न्यायपालिका ने इसे देश और प्रणाली के लिए एक कलंक बताया है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में पीड़िता ने कहा कि एसिड पिलाए जाने वाले मामलों को भी एसिड अटैक कानून के तहत शामिल किया जाए. मौजूदा कानून केवल उन मामलों को कवर करता है, जहां एसिड फेंका जाता है. पीड़िता ने बताया कि 2009 में उस पर हमला हुआ था, लेकिन आज तक ट्रायल पूरा नहीं हुआ. यह सुनकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा: “यह तो सिस्टम का मज़ाक है! अगर राष्ट्रीय राजधानी में ही ऐसे मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा, तो देशभर में क्या स्थिति होगी?”
पीड़िता की दलील और PIL का महत्व
पीड़िता ने अपनी याचिका में कहा कि एसिड पिलाए जाने वाले पीड़ितों को भी एसिड अटैक मुआवज़ा कानून के तहत शामिल किया जाए ताकि उन्हें इलाज, पुनर्वास और मुआवज़े का लाभ मिल सके. उसने बताया कि एसिड पीने से शरीर के अंदरूनी अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे पीड़ित को जीवनभर दर्द और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन मौजूदा कानून में इस तरह के मामलों को मान्यता नहीं दी गई है.
क्यों है यह मुद्दा अहम?
भारत में एसिड अटैक को लेकर कानून तो है, लेकिन यह केवल फेंके गए एसिड के मामलों तक सीमित है. एसिड पिलाए जाने वाले पीड़ितों को न इलाज का पूरा लाभ मिलता है, न मुआवज़ा. सुप्रीम कोर्ट का यह कदम ऐसे हजारों पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अब तक कानूनी संरक्षण से वंचित थे.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
CJI ने कहा कि यह घटनाएं न केवल पीड़ितों के लिए भयावह हैं, बल्कि पूरे सिस्टम को शर्मसार करती हैं. उन्होंने कहा कि यह जानकर हैरानी हुई कि लोगों को एसिड पिलाया जा रहा है. “क्या मज़ाक है ये हमारे कानूनी सिस्टम का! यह तो शर्म की बात है. 2009 का ट्रायल आज भी चल रहा है. अगर राष्ट्रीय राजधानी (दिल्ली) ही ऐसे मामलों को संभाल नहीं पा रही, तो फिर कौन करेगा?”
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए निर्देश
वहीं, याचिकाकर्ता ने बताया कि अपना केस लड़ने के साथ-साथ, वह अन्य एसिड अटैक सर्वाइवर्स की राहत के लिए भी काम कर रही हैं। सीजेआई ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से कहा कि वह मुकदमे में तेजी लाने के लिए आवेदन दायर करें।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कानून में बदलाव करने पर विचार करने को कहा ताकि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को वेलफेयर स्कीम्स का फायदा देने के लिए डिसेबल्ड लोगों में शामिल किया जा सके।



