बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें बस्तर के दूरस्थ इलाकों तक विकास की किरण पहुंचाने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का दावा कर रही हैं, वहीं बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड का सीमावर्ती गांव कोत्तापल्ली आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
तेलंगाना सीमा से सटे ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर के आश्रित ग्राम कोत्तापल्ली तक पहुंचने के लिए आज भी कोई सुगम सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि आज़ादी के बाद से लेकर अब तक कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क का समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों को किसी भी शासकीय कार्य, स्वास्थ्य सुविधा, राशन, बैंकिंग या अन्य जरूरी काम के लिए लगभग 52 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर ब्लॉक मुख्यालय आवापल्ली पहुंचना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी-नाले उफान पर होते हैं, जिससे यह यात्रा जान जोखिम में डालकर करनी पड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कोत्तापल्ली की सुध लेने के लिए वर्षों तक कोई प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव नहीं पहुंचा। बताया जाता है कि 25 मार्च 2017 को पहली बार यहां एक शासकीय शिविर आयोजित किया गया था। इसके बाद भी गांव की बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। ग्रामीण आज भी बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। आधुनिक भारत और डिजिटल युग की बातें यहां के लोगों के लिए केवल कागज़ी दावे साबित हो रही हैं। गौरतलब है कि उसूर से तेलंगाना के पुसगुफ्फा तक सड़क निर्माण हो चुका है, लेकिन भीमाराम और रायपुरम के बीच स्थित मोड़ से कोत्तापल्ली तक लगभग 20 से 25 किलोमीटर का संपर्क मार्ग आज भी नहीं बन पाया है। यह रास्ता पथरीला, दुर्गम और कई नदी-नालों से होकर गुजरता है, जिसके कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बस्तर में नक्सलवाद का प्रभाव लगातार कम हो चुका है और सरकार क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने का दावा कर रही है, तब भी कोत्तापल्ली जैसे गांव विकास की मुख्यधारा से क्यों कटे हुए हैं?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि कोत्तापल्ली तक सर्वे कर तत्काल सड़क निर्माण स्वीकृत किया जाए तथा गांव में बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस खबर के बाद गांव की सुध लेते हैं या फिर कोत्तापल्ली के लोग विकास की राह देखते हुए एक और बरसात गुजारने को मजबूर होंगे।



